कुर्मी वोट खींचने के लिए कैबिनेट में आये बेनी प्रसाद वर्मा!

लखनऊ।

कांग्रेस
में
बेनी
प्रसाद
वर्मा
का
कद
बढ़
गया।
उन्हें
इस्पात
मंत्री
बना
दिया
गया।
कई
राजनीति
दलों
के
जरिए
बी
पारी
खेल
चुके
बेनी
वर्मा
के
लिए
यह
राजनीति
दांव-पेंच
नये
नहीं
हैं।
वह
पहले
भी
अन्य
दलों
के
सहारे
सत्ता
का
सुख
भोगते
रहे
हैं।
उत्तर
प्रदेश
की
राजनीति
का
यह
काफी
जाना-पहचाना
चेहरा
है।
यह
वहीं
राजनीतिज्ञ
हैं,
जो
कभी
समाजवादी
पार्टी
की
मजबूत
कड़ी
रहे
हैं।
यही
नहीं
यह
मुलायम
सिंह
कभी
दाहिना
हाथ
कहे
जाते
थे।

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ऐन

चुनाव
के
वक्त
कांग्रेस
में
उनका
कदम
बढऩा
इस
नजरिए
से
भी
देखा
जा
सकता
है
कि
वर्मा
की
मतदाताओं
में
भी
गहरी
पैठ
है।
वह
कुर्मी
वोटों
को
खींचने
में
माहिर
हैं।
यही
कारण
है
कि
जब
मुलायम
से
उनकी
दूरी
बनी
तो
उन्होंने
समाजवादी
क्रांति
दल
बना
लिया।
बेनी
का
यह
दल
उन्हें
सत्ता
सुख
नहीं
दिला
सका
और
उन्हें
कांग्रेस
का
दामन
थाम
लिया।
वर्ष
2009
में
हुए
लोकसभा
चुनाव
में
गोंडा
सीट
से
जीतकर
संसद
में
पहुंचे।

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कबीना

मंत्री
का
पद
वह
पहले
भी
कई
बार
संभाल
चुके
हैं।
सपा
में
रहते
हुए
वर्मा
वर्ष
1996
से
1998
के
बीच
केन्द्र
की
तत्कालीन
देवगौड़ा
सरकार
में
संचार
मंत्री
के
पद
पर
भी
रहे।
वर्ष
1998,
1999
और
2004
में
सपा
के
टिकट
पर
कैसरगंज
लोकसभा
सीट
से
चुने
गए
वर्मा
ने
साल
2009
में
हुए
लोकसभा
चुनाव
में
कांग्रेस
के
टिकट
पर
गोंडा
सीट
से
जीत
हासिल
की
थी।
70
वर्षीय
बेनी
अपने
बे
राजनीति
जीवन
में
जनता
पार्टी,
भारतीय
लोकदल
और
जनता
दल
जैसे
राजनीतिक
संगठनों
से
जुड़े
रहे।
प्रदेश
सरकार
के
लोकनिर्माण
विभाग
समेत
कई
महत्वपूर्ण
महकमों
के
मंत्री
भी
रह
चुके
हैं।

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