बाहुबली विधायकों के वर्चस्व को बचाने में जुटी उनकी पत्नियां

प्रदेश में तमाम ऐसे बाहुबली विधायक हैं, जिन पर संगीन अपराध का आरोप है तथा वे जेल में सजा काट रहे हैं। बसपा सरकार में मंत्री नंद गोपाल नंदी पर जानलेवा हमले के मुख्य आरोपी जेल में बंद समाजवादी पार्टी के विधायक जय मिश्र तथा जेल में सजा काट रहे बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक उदयभान सिंह के बीच पुरानी जंग अभी जारी है फर्क बस इतना है कि इस बार जंग की बागडोर इनकी पत्नियां संभाल रही हैं। पत्नियों के इस मुकाबले को रामलली मिश्रा बनाम रीता सिंह कहा जा रहा है।
दोनों की पत्नियों की जंग प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। भदोही जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी रामलली मिश्रा पिछले दो वर्ष से विजय मिश्रा के राजनीतिक, आर्थिक व कानूनी मामलों में उनका साथ दे रही हैं। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री राकेशधर त्रिपाठी व माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र को लोकायुक्त के कटघरे में खड़ा किया जिसके बाद अचानक उनका नाम लोगों की जुबान पर आ गया। रामलली ने मिर्जापुर के ज्ञानपुर निर्वाचन क्षेत्र की कमान अपने हाथ में ले रखी है। दूसरी ओर श्री सिंह को सजा होने के बाद उनकी पत्नी रीता सिंह ने औराई से दो बार चुनाव लड़ा हालांकि दोनों बारवह असफल रही।
अब वह एक बार फिर मैदान में खड़ी हैं पति की प्रतिष्ठ बचाने के लिए चुनाव मैदान में उतरीं उनकी पत्नी को पूरी उम्मीद है कि इस बार वे कुछ अवश्य कर दिखाएंगीं। सियासी जंग में दोनों महिलाओं की जंग ने तरह-तरह के हथकंड़े आजमाये जाने लगे हैं। औराई सीट सुरक्षित होने के बाद अब रीता ङ्क्षसह ज्ञानपुर से भाग्य आजमाने को तैयार हैं। ज्ञानपुर से वर्तमान विधायक विजय मिश्रा फिलहाल मेरठ जेल में हैं उन पर प्रदेश के मंत्री नंदगोपाल नन्दी की हत्या के प्रयास समेत 65 अन्य मामले दर्ज हैं।
दो वर्ष से फरार पांच लाख के ईनामी विजय मिश्रा को हाल ही में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उदयभान सिंह और विजय मिश्रा के बीच टकराहट पहले से चल रही है। कहा जा रहा है कि दोनों ने एक-दूसरे पर हमले के लिए मुकदमें दर्ज कराये हैं। सवाल यह है कि दोनों बाहुबली विधायकों की पत्नियों के बीच जारी जंग किस मुकाम तक पहुंचती है। कौन अपने पति के वर्चस्व को बचाये रखने में कामयाब होती है।












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