कपिल सिब्बल पर भी 2जी स्पेक्ट्रम का साया

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में फंसने और इस्तीफा देने के बाद कपिल सिब्बल के पास संचार मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार है। गैर-सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटेरेस्ट लिटिगेशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें सिब्बल पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इन्फोकॉम पर लगे 650 करोड़ रुपये के हर्जाने को कम करके 5 करोड़ करने का आरोप लगाया गया है।
रिलायंस कंपनी को 2जी लाइसेंस आवंटन के समय 13 सर्किलों में सेवा उपलब्ध कराने का लाइसेंस दिया गया था। रिलायंस कंपनी ने 2जी नियमों का उलंघन करते हुए इन सर्किलों में रिमोट इलाकों में सेवा बंद कर दी। इसके बाद इस मामले में कंपनी पर हर सर्किल पर 50 करोड़ के हिसाब से जुर्माना ठोका गया था। इस हिसाब से जुर्माने की रकम 650 करोड़ रुपए बनती थी। तत्कालीन संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने दूरसंचार विभाग के अधिकारियों की बात नकारते हुए इस निजी कंपनी का हर्जाना घटाकर 5 करोड़ कर दिया। जिससे सरकारी राजस्व को 645 करोड़ का नुकसान हुआ है।
इस मामले में अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवटी की भूमिका की भी जांच की जाएगी। उन पर भी कपिल सिब्बल के साथ मिलकर पूर्व संचार मंत्री ए राजा के पक्ष्ा में राय देने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में अगली सुनवाई 11 जुलाई तक होनी है। अगर इस बार कपिल सिब्बल पर भी मामला साबित हो गया तो 2जी स्पेक्ट्रम मामले में इस बार कांग्रेस की भी किरकिरी हो सकती है। पहले तो इस मामले में यूपीए ने डीएमके के सांसदों के शामिल होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया था।
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