भूमी अधिग्रहण मामले पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से सपाई खुश

मालूम हो कि उच्चतम न्यायालय ने नोएडा एक्शटेंशन के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को अवैध करार दिया। न्यायालय ने कहा कि शाहबेरी, सूरजपुर, गुलिस्तापुर और जलालपुर के किसानों को उनकी जमीन लौटा दी जाए तथा ग्रामीणों की जमीन पर जो निर्माण किए गये हैं उन्हें ध्वस्त कर दिया जाए। कोर्ट ने नोएडा अथारिटी पर दस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
न्यायालय का फैसला आते ही ग्रामीणों के साथ सपा में भी खुशी की लहर दौड़ गयी। सपा नेताओं ने कहा कि खेती की जमीन पर शॉपिंग माल व काम्प्लेक्स बनाने के लिए जमीन देने वाली सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने काफी लताड़ा। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार दलितों, गरीबों और किसानों की नहीं बल्कि उद्योगपतियों के साथ है। सपा नेताओं के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण कानून को दमन का तंत्र एवं जन विरोधी कहा। इस बात को ध्यान में रखते हुए सपा अधिग्रहण के इस कानून में बदलाव की मांग करती है।
सपा नेता ने कहा कि प्रदेश की बसपा सरकार ने गंगा एक्सप्रेस वे, यमुना एक्सप्रेस वे व ताज कारिडोर के नाम पर टाउनशिप बनाने के लाइसेंस अपने चहेतों को बांटे। सपा का आरोप है कि सरकार ने किसानों से जबरन उनकी जमीन सस्ते में लेकर बिल्डरों को ऊंचे दामों पर बेची और कमीशन बनाया है। सपा का कहना है कि सरकार का कार्य है कि वह जनता के हित में कार्य कार्य करे लेकिन वर्तमान सरकार जनता की समस्याओं को दूर करने की बजाय व्यापार कर रही है।
सपा का कहना है कि सरकार प्रत्येक सरकारी काम में कमीशन ले रही है। सपा नेताओं ने कहा कि सरकार न्यायालय को गुमराह करने में किसी से पीछे नहीं है। उत्तर प्रदेश की जनविरोधी सरकार को जल्द से जल्द सत्ता से दूर होना चाहिए। सपा ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब केन्द्र को बसपा की मायावती सरकार को तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए।












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