डॉ. सचान मामले में खुलासा, पुलिस ने मौत से पहले ही कराया सादे कागज पर हस्ताक्षर

यह कोई ऐसा वैसा खुलासा नहीं बल्कि इसकी सूचना खुद डॉ सचान ने जेल से परिवार कल्याण, महानिदेशालय के संयुक्त निदेशक (प्रशासन) राजेंद्र कुमार सिंह को एक पत्र लिखकर दी थी। यह पत्र 10 अप्रैल को लिखा गया था। आईबीएन7 न्यूज चैनल पर प्रसारित खबर की मानें तो डॉ. सचान ने संयुक्त निदेशक (प्रशासन) को लिखे पत्र में कहा है कि महोदय, आपको अवगत कराना है कि रिमांड पर 8 अप्रैल को जेल से लाते समय मुझसे, डॉ. सीजे यादव व पीसी वर्मा से कोरे कागज पर डरा धमका कर हस्ताक्षर कराए गए थे। हम लोगों ने हस्ताक्षर कर दिए।
उन्होने आगे लिखा है कि हमें संदेह है कि कागज का कोई दुरुपयोग न किया जाए। यदि ऐसा होता है, तो पूरी जिम्मेदारी प्रशासन व आपकी स्वयं की होगी। पत्र के अंत में डॉ. सचान ने अपना नाम लिखकर हस्ताक्षर भी किए हैं। पत्र को देखकर ऐसा लग रहा है कि डॉ सचान ने काफी जल्दबाजी में उस पत्र को लिखा है क्योंकि उसमें हिंदी के कई ऐसे मात्राएं हैं जो गलत हैं या फिर गायब ही हैं।
उल्लेखनीय है कि डॉ. सचान की 22 जून को जेल के भीतर हुई संदिग्ध हालात में मौत के बाद उनकी पत्नी डॉ. मालती ने भी मीडियाकर्मियों को बताया था कि उनके पति से सादे कागज पर दस्तखत कराए गए थे। डॉ.मालती का कहना है कि पति ने कोर्ट में हुई मुलाकात के दौरान उन्हें इसकी सूचना दी थी। वहीं डॉ. सचान द्वारा जेल से पत्र लिखे जाने के सवाल पर अब तक अधिकारी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे थे। इस तथ्य को लगातार छुपाने का प्रयास किया जा रहा था। अब इन पूरे मामले में जो सवाल पैदा हो रहे हैं वह इस प्रकार है।
1. आखिर किसके इशारे पर पुलिस ने यह किया?
2. जिस कागज पर हस्ताक्षर कराए गए, उसका पुलिस क्या इस्तेमाल कर सकती है?
3. आखिर पुलिस को तीनों आरोपियों के सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने की क्या जरूरत थी?
4. पुलिस ने किसके इशारे पर यह किया। वह कागज कहां है?
इस सवालों के साथ इस आशंका भी नकारा नहीं जा सकता कि डॉ.सचान की मौत किसी गहरी साजिश का परिणाम है। कृप्या कर अपनी राय से हमें अवगत कराएं। कमेंट बाक्स में अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराने के लिये अपने फेसबुक, जीमेल या फिर ट्विटर एकाउंट से लॉगइन करें। हमें आपके प्रतिक्रिया इंतजार रहेगा।
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