यूपी: डॉ. सचान का सच सामने ना आये इसलिये माया ने पिटवाया पत्रकार को

Mayawati
लखनऊ। बलात्‍कार और सिलसिलेवार मर्डर की घटनाओं में पुलिस की संलिप्‍तता को लेकर पहले ही अपने दामन में दाग लगा चुकी मायावती सरकार ने रविवार की रात जो कुछ भी किया वह उससे भी ज्‍यादा शर्मनाक थी। आये दिन हो रही वारदातों को देखकर यह अंदाजा तो लगाया ही जा रहा था सूबे में आम आदमी सुरक्षित नहीं हैं मगर अब यह भी साबित हो गया कि सच सामने लाने वाली मीडिया पर भी कब हमला हो जाए कहा नहीं जा सकता। सीएमओ हत्याकांड और डॉ. सचान की मौत की खबर का पर्दाफाश करने वाले एक मान्‍यता प्राप्‍त चैनल के संवाददाता (ब्‍यूरो) शलभ मणि त्रिपाठी पर रविवार की देर रात पुलिस अधिकारियों ने हमला कर दिया और उन्‍हें उठाकर थाने ले गये और सुनियोजित ढंग से एक लड़की के साथ जोड़कर केस में घसीटने की कोशिश की गई।

जी हां रविवार की शाम आईबीएन7 की दफ्तर से निकलते वक्‍त पुलिस के दो अधिकारियों ने उन्‍हें बाहर ही पकड़ लिया। उनके साथ चैनल के वरिष्‍ठ संवाददाता मनोज राजन त्रिपाठी भी थे। मनोज राजन त्रिपाठी को पुलिस ने अपराधियों की तरह दौड़ाया। वो अपने आप को बचाने में कामयाब रहे और मौके पर मीडिया कर्मियों को जमा करने में सफल रहे। जिसके बाद पत्रकारों के दबाव में पुलिस अधिकारियों को शलभमणि त्रिपाठी को छोड़ना पड़ा। ये अधिकारी हैं हजरतगंज थाने के सीओ अनूप कुमार और एएसपी बी पी अशोक। दूसरी तरफ लखनऊ में मीडिया पर हुए इस हमले के खिलाफ पत्रकार बीती रात सड़क पर उतर आए। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री निवास के आगे प्रदर्शन किया जिसके बाद दबाव में आकर यूपी सरकार ने दोषी अधिकारियों को सस्पेंड कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।


आखिर कौन है जिसके इशारे पर हो रही है यूपी में खुलेआम गुंडागर्दी

उत्तर प्रदेश में वरिष्‍ठ पत्रकार पर हुए हमले ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं। इन सवालों का जबाब निकलना बहुत जरुरी हो चुका है। इस घिनौनी वारदात के बाद तो सिर्फ चंद सवाल ही है जो सुरक्षा और खुली जिंदगी को लेकर सोचने मजबूर कर रही हैं। तो आईए उन सवालों पर नजर डालते हैं-

1. क्या उत्तर प्रदेश में अब सच बोलना गुनाह हो गया है?

2. क्या उत्तर प्रदेश सरकार में सवाल बर्दाश्त करने की ताकत नहीं बची?

3. क्या मीडिया पर हुआ ये हमला लोकतंत्र पर हमला नहीं है?

4. आखिर किसके इशारे पर पत्रकार पर हमला किया गया?

उत्तर प्रदेश में पुलिस का गुंडाराज

गौरतलब है कि डॉक्टर सचान केस में बौखलाई यूपी सरकार ने आईबीएन7 संवाददाता शलभमणि त्रिपाठी समेत पूरी टीम पर हमला बोल दिया। उनके साथ पुलिस ने अपराधियों की तरह व्यवहार किया। दोनों को गालियां दी गई और पीटा गया। इन सभी वारदतों से यह तो साफ हो गया है कि प्रदेश में खाकी के वेष में खुलेआम गुंडागर्दी की जा रही है। इस बात का सबसे ताजा उदाहरण लखनऊ हाई सिक्यूरिटी जेल में डिप्टी सीएमओ डॉक्टर सचान की मौत खुदकुशी नहीं थी मर्डर था इसका सबसे पहले खुलासा आईबीएन7 रिपोर्टर शलभ मणि त्रिपाठी पर पुलिस द्वारा हमला किये जाना है।

;
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+