कश्मीर समस्या नेहरू परिवार की देन: आडवाणी

Kashmir problem is Nehru's special gift to India: Advani
नई दिल्ली । कांग्रेस पार्टी एक ही परिवार की जागीर बनकर रह गई है। इसकी देश को बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग पर ये विचार जताए हैं। आडवाणी ने ब्लॉग में लिखा है, 'कांग्रेस पर केवल एक ही परिवार का कब्जा है। ऐसे में या तो उनके परिवार का या उनके द्वारा चुना गया व्यक्ति ही प्रधानमंत्री बनता है। वर्तमान में कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा चुने गए प्रधानमंत्री की वजह से देश को बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।" आडवाणी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का एक बड़ा हिस्सा चाहता रहा है कि नेहरू परिवार से ही कोई प्रधानमंत्री पद संभाले। लेकिन भारत जैसे लोकतांत्रिक देश को किसी परिवार की जागीरदारी बनाना गलत है।

वहीं आडवाणी ने अपने ब्लाग में कहा है कि कश्मीर समस्या नेहरू परिवार का देश को दिया गया विशेष उपहार है। विभाजन के समय इसका हल निकाल पाने में जवाहर लाल नेहरू की असफलता की देश भारी कीमत चुका रहा है। आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा, दु:ख की बात है कि न तो दिल्ली में नेहरू सरकार और न ही श्रीनगर में शेख अब्दुल्ला सरकार ने कभी इस बात को माना कि जम्मू-कश्मीर का भारत में पूरी तरह एकीकरण करने की जरूरत है।

इस मामले में नेहरू जी में साहस और दूरदर्शिता की कमी रही। आडवाणी के मुताबिक, अनुच्छेद 370 को पंडित नेहरू ने एक अस्थायी प्रावधान घोषित किया था, जिसे अब तक रद नहीं किया गया है। यही वजह है कि है कि पाकिस्तान के भारत विरोधी संगठनों द्वारा मदद पा रहे अलगाववादी कश्मीर में लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने लिखा, जम्मू-कश्मीर राजशाही वाला एकमात्र राज्य था, जिसे भारत से जोड़े जाने की प्रक्रिया सीधे प्रधानमंत्री नेहरू की देखरेख में हो रही थी।

आडवाणी ने आगे लिखा है, 1971 के युद्ध में भी भारत ने कश्मीर मुद्दे को हल करने का मौका गंवाया। इस युद्ध में भारत ने न केवल पाकिस्तान को हराया, बल्कि उसके लगभग 90,000 युद्धबंदी भी भारत में लाए गए। आडवाणी ने देश के शैक्षणिक संस्थानों में सिर्फ नेहरू परिवार का महिमामंडन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यहां दूसरे नेताओं के योगदान की जान-बूझकर अनदेखी की जा रही है।

उन्होंने ब्लॉग पर लिखा, शिक्षा तंत्र नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, हिरेन मुखर्जी, एके गोपालन और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे दूसरे नेताओं की बात जानबूझ कर नहीं करता। उन्होंने लिखा है कि डॉ. मुखर्जी ने देश की एकता और अखंडता के लिए जो शहादत दी, उसे देश के शैक्षणिक संस्थानों में न पढ़ाया जाना शर्मनाक है।

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