दिल्ली: सेना में भर्ती कराने के नाम पर ठगी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस ने सेना में भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह को पकड़ा है। गिरोह के सदस्य मेजर और सूबेदार बनकर आर्मी में भर्ती होने का झांसा देते थे। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में सेना के दो सेवानिवृत कर्मचारियों सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान राम बाबू शुक्ला (45), मान सिंह (43), संजय मिश्रा (33) व शिव नारायण (40) के रूप में हुई है। सभी यूपी के रहने वाले हैं। गिरोह के सदस्य भर्ती के लिए उम्मीदवारों का प्रवेश पत्र बना लिखित परीक्षा व उनका साक्षात्कार लेते थे। एक व्यक्ति डाक्टर बन उनका मेडिकल जांच भी करता था। सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी लोगों से संपर्क तोड़ देते थे।
सूत्रों ने बताया कि गिरोह का सरगना राम बाबू शुक्ला है। वह छह वर्षो से गिरोह चला रहा है। दिल्ली पुलिस उपायुक्त (अपराध शाखा) अशोक चांद ने बताया कि दिल्ली में डीटीसी में सहायक टिकट इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत ईश्वर सिंह ने 15 जून को पुलिस में ठगी की शिकायत दर्ज कराई। उसने पुलिस को बताया कि उनके तीन भतीजों को आर्मी में भर्ती कराने के नाम पर उनसे 11 लाख रुपये ठग लिए। मुकदमा दर्ज कर अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जॉय टर्की ने 16 जून को पीतमपुरा के समीप से राम बाबू शुक्ला को धर दबोचा। उसके पास से आर्मी मेडिकल कोर की मेजर की वर्दी सहित 15 उम्मीदवारों के मूल प्रमाणपत्र बरामद हुए।
पुलिस ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के समीप से मान सिंह, संजय मिश्रा व शिव नारायण को भी गिरफ्तार कर लिया। मान सिंह के पास से भी मेजर की वर्दी, 11 उम्मीदवारों के असली सर्टिफिकेट व सेना की 32 खाली उत्तर पुस्तिका बरामद हुई। पूछताछ में पता चला कि वर्ष 1985 में राम बाबू आर्मी में जवान के पद पर नियुक्त हुआ था। वर्ष 2004 में नायक के पद से सेवानिवृत होने के बाद उसने फतेहपुर जिला स्थित हरिहर गंज में सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवकों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। बाद में ज्यादा पैसा कमाने के लालच में वह सहयोगियों के साथ फर्जी आर्मी भर्ती रैकेट चलाने लगा। वह खुद को आर्मी का मेजर बता सेना में सुनिश्चित भर्ती का लोगों को झांसा देता था।
मान सिंह भी वर्ष 1985 में सेना में जवान के रूप में भर्ती हुआ था। 1990 में स्वास्थ्य कारणों से उसने सेना की नौकरी छोड़ दी थी। वह भी लोगों को खुद को सेना का मेजर बताता था। आरोपी संजय मिश्रा खुद का परिचय सेना के सूबेदार के रूप देता। संजय मिश्रा सातवीं पास है तथा पंजाब की एक फैक्ट्री में काम करता है। बताया जा रहा है कि ये लोग एक-एक उम्मीदवार से करीब 2.50 लाख से तीन लाख भर्ती के नाम पर वसूलते थे।












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