रामदेव के योग शिविरों में ना जाकर खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे कांग्रेसी

इस बात के पीछे के तर्क खोजने हैं, तो चलिये चलते हैं बाबा के शिविरों में। बाबा के शिविर किसी पार्टी विशेष को देख कर आयोजित नहीं किये जाते, ये हमेशा आम लोगों के लिए होते हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता शिविर में शिरकत नहीं करते हैं, तो उनकी खुद की छवि उन लोगों के बीच खराब होगी, जो वहां शामिल होंगे। जनता यह बात अच्छी तरह जानती है कि कांग्रेस काले धन और भ्रष्टाचार के लिए बदनाम हो चुकी है और बाबा रामदेव इन्ही दोनों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।
बाबा की इस तरह से खिलाफत कर कांग्रेस ने जनता के सामने साफ तौर पर दर्शा दिया दिया है कि वो भ्रष्टाचार से लड़ने वालों का साथ कभी नहीं देगी। कांग्रेस के इस फरमान ने भट्टा परसौल में राहुल गांधी की मेहनत, उत्तर प्रदेश में रीता बहुगुणा जोशी के तमाम अभियानों और सोनिया गांधी के तमाम संकल्पों को धो डाला है। बाबा की खिलाफत का सीधा असर यूपी विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। यह इसलिए क्योंकि देश की जनता का एक बहुत महत्वपूर्ण वर्ग बाबा को मानने वाला है।
देश की जनता का झुकाव राजनीतिक पार्टियों से ज्यादा बाबा रामदेव की तरफ है। ऐसे में जनता के दिल व दिमाग पर यह छाप पड़ चुकी है, कि जो बाबा के खिलाफ है, वही भ्रष्टाचारी है। जनता की यह सोच कांग्रेस के लिए चुनाव में बड़ी हार का कारण बन सकती है।












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