लोकपाल विधेयक के दो मसौदे नहीं होंगे : मोइली
नई
दिल्ली। सरकार ने लोकपाल विधेयक पर समाज के प्रतिनिधियों के साथ तीखे मतभेदों के बीच आज इस संभावना से इंकार कर दिया कि इस विधेयक के दो मसौदे केन्द्रीय कैबिनेट के समक्ष भेजे जाएंगे। समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को बाधित कर रही है। id="toptextpromo"> कानून मंत्री एवं संयुक्त लोकपाल मसौदा समिति के संयोजक वीरप्पा मोइली ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यदि 20 जून को होने वाली अगली बैठक में दोनों पक्षों के प्रतिनिधि आपसी मतभेदों को दूर नहीं कर पाए तो उनके विचारों को कैबिनेट के समक्ष भेजा जाएगा।उन्होंने कहा कि लेकिन दो मसौदे नहीं होंगें। उन्होंने समाज के प्रतिनिधि अरविन्द केजरीवाल के बुधवार को दिए गए बयान का विरोध करते हुए यह बात कही। केजरीलवाल ने कहा था कि सरकार के प्रतिनिधियों और समाज के प्रतिनिधियों द्वारा बनाए गए दो अलग अलग मसौदे कैबिनेट के समक्ष भेजे जाएंगे। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>समाज के प्रतिनिधियों पर मांगें बदलने का आरोप लगाते हुए मोइली ने कहा कि इससे मदद नहीं मिलेगी। हमेंं संयुक्त मसौदा समिति के आदेश तक खुद को सीमित रखना चाहिए।उन्होंने कहा कि सरकार ने मजबूत लोकपाल विधेयक के लिए समाज के प्रतिनिधियों द्वारा रखे गए 40 में से 34 सिद्धांतों को मान लिया है।मोइली ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून में प्रधानमंत्री को शामिल किए जाने के मुद्दे पर अभी अंतिम तौर पर कोई निर्णय नहीं किया गया है।












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