लादेन से भी ज्‍यादा शातिर और खतरनाक है अल जवाहिरी

दिल्‍ली। आखिरकार लादेन की खाली गद्दी पर बैठने वाले का नाम घोषित कर ही दिया गया। जी हां अल जवाहिरी को लादेन का उत्‍तराधिकारी बना दिया गया है। अब ऐसे में इस खबर को पढ़ने के बाद हर किसी के मन में यह सवाल पैदा हो रहा होगा कि लादेन की कुर्सी पर बैठने वाला 110 करोड़ रुपये का इनामी अल जवाहिरी कौन है और कितना खतरनाक है। तो आईए हम अल जवाहिरी का संक्षिप्‍त परिचय देकर आपके जेहन में उठने वाले तमाम सवालों का जबाब देते हैं।

अयमन अल जवाहिरी अल कायदा का मास्टर माइंड है। अगर बिन लादेन ने अलकायादा को मजबूत बनाने में पैसे लगाए तो जवाहिरी ने अक्ल। इसीलिए अयमन अल जवाहिरी को अलकायदा में दूसरे नम्बर पर माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका तक अल कायदा का जाल फैलाने में ज़वाहिरी का ही शातिर दिमाग था। माना जाता है कि 11 सितम्बर के हमले से पहले जवाहिरी ने कई देशों की यात्रा की। मकसद था अलकायदा में नए लोगों की भर्ती करना।

आयमन अल जवाहिरी मिस्र का नागरिक है। आतंकवादी बनने से पहले ये आखों का डॉक्टर था। 1979 में जवाहिरी ने इजिप्टिएन इस्लामिक जिहाद नाम का एक संगठन बनाया। 1981 में उसपर मिस्र के राष्ट्रपति की हत्या की साजिश का आरोप लगा। जिसके लिए उसे तीन साल की सजा हुई। 1984 में जेल से छूटने के बाद वो अफगानिस्तान में घुसी सोवियत सेना से लड़ने के लिए पहुंच गए।

1986 में अफगानिस्तान में उसकी मुलाकात ओसामा बिन लादेन से हुई। ओसामा भी उस समय सोवियत संघ के खिलाफ काम कर रहा था। उसका संगठन अलकायादा अभी नया नया ही बना था। सोवियत सेना के अफगानिस्तान से वापस चले जाने के बाद ज़वाहिरी भी अपने देश वापस चला गया। जवाहिरी एक बार फिर से जिहाद को आगे बढ़ाने में लग गया। साल भर मिश्र में रहने के बाद वो सूडान पहुंच गया। 26 जून 1995 को उसने मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक पर कातिलाना हमला किया।

यहीं से शुरू हआ उसके सगठन का खूनी खेल। नवम्बर 1995 में इस्लामाबाद में मिस्र के दूतावास पर हमले में सोलह लोग मारे गए। ये उसकी पहली बड़ी कामयाबी थी। छह महीने बाद उसे सूडान से बाहर कर दिया गया। वो अपने चार सौ साथियों के साथ अफगानिस्तान पहुंच गया। दिसम्बर 1996 में चेचन्या की यात्रा के दौरान उसे दागेस्तान में अवैध तरीके से घुसने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन छह महिनों मे ही वो जेल से छूट गया। 1998 में उसने अपने संगठन को बिन लादेन के संगठन अलकायदा में मिला दिया।

इसके बाद से अल कायदा का नेटवर्क फैलाने में इसकी एक अहम भूमिका रही। अफगानिस्तान युद्ध के दौरान टोरा बोरा पर हुई अमेरिकी बमबारी में अल जवाहिरी की पत्नी और चार बच्चे मारे गए। लेकिन निर्वासित जिंदगी में रहते हुई भी उसकी अलकायदा पर पकड़ कम नहीं हुई।

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