दिल्ली : साप्ताहिक बाजारों में चलाए जा रहे हैं नकली नोट

युवक नकली नोट कमीशन पर लाता था और एनसीआर में उसे साप्ताहिक बाजारों में खपाता था। एसओजीका दावा है कि पकड़े गए युवक के पास से जो नोट मिले हैं। वह नेपाल के रास्ते बिहार में सक्रिय नकली नोटों का कमीशन पर धंधा करने वालों के पास पहुंच रहे है।मुखबिर की सूचना पर एसओजी ने मालदा पं.बंगाल निवासी भोला झा को 12 हजार रुपये के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया है।
बरामद नोट पचास-पचास के थे और तीन सीरीज में थे। सभी नोटों में एक ही सीरियल नंबर था। पूछताछ में भोला ने बताया कि उसे यह नोट 50 प्रतिशत कमीशन पर मोतिहारी बिहार में रहने वाला एक युवक देता था। जिसे वह नोएडा व एनसीआर के अन्य शहरों में छोटी छोटी दुकानों पर खपाता था।अब तक दो लाख रुपये के नकली नोट खपा चुका है। पुलिस गिरफ्तार भोला से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
वारदात कर बिहार भाग गए एक बदमाश का नंबर एसओजी की सर्विलांस टीम सुन रही थी।बातचीत के दौरान एसओजी को भोजपुरी में नोटों के खरीदने व बेचने की बातचीत सुनाई दी। इसके बाद एसओजी ने अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया। घेराबंदी कर भोला को नकली नोट कमीशन पर लेने का झांसा देकर एसओजी के एक सिपाही ने नकली ग्राहक बन कर बातचीत की और उसे नया गांव बुला लिया और नकली नोट के साथ पहुंचे भोला को पकड़ लिया।
भोला के जरिए उसके आका तक पहुंचने की कोशिश की। फोन पर भोला से उसकी बातचीत कराई लेकिन वह दिल्ली या उसके आसपास आने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद मोतिहारी स्टेशन पर आकर ही नोट देने का झांसा एसओजी ने भोला के माध्यम से उसे दिया, लेकिन वह नहीं आया। एसओजी के मुताबिक मोतिहारी निवासी वह युवक नेपाल जाकर नकली नोट लाता है।
नोएडा में इससे पहले भी नकली नोटों के सौदागर पकड़े जा चुके हैं लेकिन आज तकपुलिस कभी मास्टर माइंड या गिरोह के आका तक नहीं पहुंच सकी है। केवल कैरियर कीगिरफ्तारी के बाद खामोश हो गई है। इससे पहले दादरी, कासना, थाना सेक्टर-58,सेक्टर-39 के अलावा एटीएस ने भी नकली नोटों के सौदागर को पचास और पांच सौ रुपयेके नोटों के साथ एक साल में आधा दर्जन लोगों को पकड़ चुकी है।
पुलिस के मुताबिक छोटे-छोटे नोटों के नकली होने का शक किसी को नहीं होता और वहबिना जांच पड़ताल के ले लेते हैं। ग्राहक बन कर दुकानों पर जाने वाले नकली नोट खपाने वाले युवक पचास रुपये का नोट देकर दस या पंद्रह रुपये का ही सामान लेते हैं। बाकी रुपये दुकानदार वापस करता है, जो असली नोट होते हैं। नकली नोटों के सौदागरों का मुख्य टारगेट साप्ताहिक बाजारों के दुकानदार होते हैं। क्योंकि माल
बेचने के चक्कर में वह नोटों की जांच नहीं करते हैं।












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