शायद ही खुल सकेगा राणा की रिहाई का राज

ज्यूरी के निवेदन के बाद यह निर्णय लिया गया था कि इसके सभी 12 सदस्यों की पहचान कभी भी नहीं बताई जाएगी और इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। दूसरी तरफ इस फैसले से न सिर्फ मुंबई हमले के पीडि़तों को निराशा हुई है बल्कि भारत और अमेरिकी सरकार भी निराश हैं। इस फैसले के बाद जो सबसे बड़ा सवाल उभरकर आया है वह यह है कि कैसे कोई मुंबई हमलों के जिम्मेदार आतंकवादी संगठन को सहायता तो मुहैया करा सकता है लेकिन खुद उस हमले में संलिप्त नहीं हो सकता।
इस बारे में अभी तक सबसे करीबी स्पष्टीकरण अमेरिकी अटॉर्नी पैट्रिक फिट्जगेराल्ड की तरफ से दिया गया। फैसले के तुरंत बाद उन्होंने कहा कि उनके अनुसार मुंबई मामले में राणा को दोषमुक्त इसलिए करार दिया गया क्योंकि अभियोजक यह सिद्ध करने में नाकाम रहे कि मुंबई हमला होने से पहले राणा को इसके बारे में जानकारी थी। फिट्जगेराल्ड ने कहा था कुल मिलाकर मैं निराश नहीं हूं। मैं सिर्फ मुंबई मामले में दोषमुक्ति (राणा की) से निराश हूं लेकिन कुल मिलाकर मैं संतुष्ट हूं क्योंकि दो अन्य मामलों का दोष बहुत गंभीर हैं।
दूसरी तरफ, राणा के वकील चार्ली स्विफ्ट का मानना है कि ज्यूरी ने सबूतों के आधार पर फैसला दिया। चार्ली ने कहा सबूत साफ थे कि मुंबई आतंकवादी हमलों में राणा का हाथ नहीं था। इससे पहले शिकागो की अदालत ने राणा को पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को मदद देने और डेनमार्क में हमले की साजिश रचने के मामले में दोषी करार दिया था जबकि सबसे संगीन यानी मुंबई हमले की साजिश में शामिल होने के आरोप से उसे मुक्त कर दिया गया।












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