दिल्ली : तीस हजारी कोर्ट में कैदी भिडे़, आठ जख्मी

Lathicharge
नई दिल्ली। तीस हजारी अदालत के लॉकअप में विचाराधीन कैदियों के दो गुट भिड़ गए। कैदियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोलेतक छोडऩे पड़े। आठ कैदी घायल हो गए जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के समय लॉकअप के सामने भीड़ लगी थी। बाद में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और बिना अदालत की कार्रवाई में भाग लिए कैदियों को जेल भेज दिया गया।

तीस हजारी अदालत स्थित मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विनोद यादव खुद मौके पर गए और पुलिसकर्मियों को बेकाबू कैदियों को नियंत्रित करने केनिर्देश दिए। साथ ही, पुलिस उपायुक्त को घटना की जानकारी दी। काफी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया। इसके बाद कैदियों पर काबू पाया जा सका।

तीस हजारी अदालत में पेशी के लिए करीब १२५ विचाराधीन कैदियों को लाया गया था। सुबह साढ़े दस बजे कैदियों के एक गुट में जोगिंदर उर्फ जोगा, मनीष,हरदयाल और जोगिंदर शामिल थे। जबकि दूसरे में अब्दुल शहजाद, शहजाद कमल,मोहम्मद इशराज, अफसर और नसीम शामिल थे। दोनों गुटों में किसी बात को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। अचानक सुबह साढ़े दस बजे दोनों गुट आपस में
भिड़ गए।

लॉकअप में ईंट और सीमेंट से बने स्लैब को कैदियों ने तोड़ दिया और एक-दूसरे पर ईंट चलाने लगे। पुलिस ने कैदियों को काबू करने के लिएआंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। जैसे ही शोरशराबा हुआ मौके पर स्वयं सीएमएम पहुंचे। उन्होंने देखा कि शहजाद कमल और हरदयाल अचेतावस्था में पड़े थे। कुल १७ कैदी घटना में घायल हो गए। जांच के दौरान कैदियों के पास से चार सर्जिकल ब्लेड बरामद किए गए। इस दौरान कैदियों के परिजनों औरअन्य लोगों की भी लॉकअप के सामने जबरदस्त भीड़ लग गई थी।

तीस हजारी लॉकअप में अक्सर ब्लेडबाजी और कैदियों के बीच झड़प से सीएमएम अदालत ने जेल महानिदेशक को आदेश दिया है कि हार्ड कोर क्रिमिनल जो अक्सर ब्लेडबाजी की घटना में लिप्त पाए जाते हैं, उन्हें वीडियो कांफ्रेंसिंग से अदालत में पेश किया जाए। अदालत ने घटना की जानकारी जिला जज और दिल्ली हाईकोर्ट को भी दी है।

एक सप्ताह के अंदर घटी ऐसी दूसरी घटना के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए निर्देश दिया है कि ऐसेअपराधियों को अदालत में अलग-अलग तारीख पर पेश किया जाए।

जेल प्रशासन को आदेश दिया गया है कि ऐसे कैदियों की सूची तैयार करके अदालत को बताया जाए ताकि जिन अदालतों में उनके मामले की सुनवाई चल रही है, उन कैदियों को अलग-अलग तारीख अदालत से मिले। साथ ही पुलिस उपायुक्त थर्ड बटालियन को आदेश दिया गया है कि ब्लेडबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए लॉकअप के सामने मेटल डिटेक्टिंग मशीन लगाई जाए ताकि ब्लेड अंदर न जा सके।

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