महिला बनकर भी पुलिस की आंख में धूल नहीं झोंक सके बाबा रामदेव

इसके बाद सलवार- कमीज पहन कर घायल महिला का वेश धारण किया और दो महिलाओं के कंधों पर हाथ रखकर लंगड़ाते हुए बाहर निकलने का प्रयास किया। हालांकि, योगगुरु की यह चाल सफल नहीं हुई, क्योंकि पुलिस वालों को इस बात पर शक हुआ कि घायल महिला ने एंबुलेंस में चढ़ने की उनकी पेशकश क्यों ठुकरा दी। दरअसल, रात करीब एक बजे जब पुलिसकर्मी रामलीला मैदान में घुसे तो बाबा रामदेव माइक्रोफोन की ओर दौड़े और नींद के आगोश में जा चुके अपने अधिकतर समर्थकों को जगाने के लिए वंदे मातरम का नारा लगाया।
बड़ी संख्या में लाठी और बंदूकधारी पुलिसकर्मियों ने मंच पर चढ़ने की कोशिश की। इसके बाद बाबा ने अपना सामान इकट्ठा करने के लिए उनसे पांच मिनट मांगे, फिर अचानक ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए तीन मीटर ऊंचे मंच से छलांग लगा दी और उस ओर भागे, जहां महिलाएं बैठी हुई थीं। पुलिस ने उनकी तलाश तेज कर दी, लेकिन वे सभी को चकमा देते हुए मंच के पीछे चले गए, जहां उन्होंने भगवा वस्त्र उतारकर सफेद रंग की सलवार कमीज पहन ली।
विशेष आयुक्त (कानून-व्यवस्था) धर्मेद्र कुमार ने पत्रकारों को बताया कि रामदेव ने महिला का वेश धारण कर लिया। मुंह को सफेद रंग के दुपट्टे से ढकने के बाद वह दो महिलाओं का सहारा लेकर लंगड़ाते हुए बाहर निकले। पुलिसकर्मियों ने घायल महिला को देखकर एंबुलेंस में अस्पताल पहुंचाने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। संदेह होने पर रोका तो वह बाबा रामदेव निकले।












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