काले धन, भ्रष्टाचार पर एक कसम बाबा रामदेव भी खायें

अन्ना के सिर्फ एक कदम पर सरकार नतमस्तक हो गई और देश की जनता ने जश्न भी मना लिया, क्योंकि सरकार ने लोकपाल बिल के मसौदे को तैयार करने की हामी भर दी। निरीह जनता इसी से खुश है। क्या इससे भ्रष्टाचार खत्म होगा? यह लाख टके का सवाल है जो आज भी निरउत्तर है।
पैदा होने से पहले ही भ्रष्टाचार का शिकार
पूछिए उन दो सीएमओ के परिवार से जिनके ऊपर परिवार कल्याण की जिम्मेदारी थी। उनका गुनाह सिर्फ इतना ही जान पड़ता है कि वो किसी भ्रष्टाचार में शामिल होने से गुरेज करते रहे होंगे। अंजाम इतना भयावह होगा तो कौन करेगा भ्रष्टाचार का विरोध। परिवार कल्याण विभाग के घोटाले दर घोटाले खुलते गये। सरकार ने अपनी लापरवाही मानते हुए मंत्रियों के इस्तीफे ले लिए। पुलिस भी हत्यारों को पकडऩे के बजाय हवा में तीर चला रही है। ताज़ा उदाहरण लें तो गाजियाबाद के जिला अस्पताल में प्रसव के लिए आयी एक महिला दर्द से रात भर तड़पती रही, लेकिन डॉक्टरों ने हाथ तक नहीं लगाया। सिर्फ इसलिए क्योंकि महिला के पति ने डॉक्टरों की जेब नहीं भरी थी। सुबह होते-होते महिला और उसका अजन्मे बच्चे की मौत हो गई।
वह बच्चा धरती पर आने से पहले ही भ्रष्टाचार का शिकार हो गया। ऐसे देश में लाखों परिवार हैं, जो रोज़ देश के भ्रष्ट नेताओं की दरिंदगी का शिकार होते हैं। किसी को खाने को नहीं मिलता तो कोई बेरोजगार है। लाखों छात्र प्रिंसिपल की जेब नहीं भर पाने के कारण अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। लाखों लोग अनाज नहीं पहुंच पाने के कारण भूखे सो जाते हैं। यह फेहरिस्त इतनी लंबी है, जिसे एक लेख में पिरोना किसी के बस की बात नहीं।
काले धन और भ्रष्टाचार से के खिलाफ यह लड़ाई जितनी सड़कों पर नजर आ रही है उससे कहीं ज्यादा फेसबुक व ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर। इससे यह साफ जाहिर है कि आम जनता त्रस्त हो चुकी है। दिल्ली के राम लीला मैदान पर देश भर से 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंच चुके हैं। लोग यहां बाबा के भजन गा रहे हैं। वहीं बाबा लोगों को आपना भाषण सुना रहे हैं। इन सब के बीच कई केंद्रीय मंत्री बाबा को मनाने का मौका ढूंढ़ रहे हैं।
कसम खायें बाबा रामदेव
इस लड़ाई का अंत कब ओगा, पता नहीं, लेकिन उसके अंत से पहले यह सवाल जरूर उठता है कि बाबा रामदेव की यह लड़ाई कितनी कारगर साबित होती है। बाबा रामदेव यह लड़ाई जीत भी गये, तो तो बाबा अपने शिष्यों से और अन्ना अपने समर्थकों से शपथ लें कि न तो वो भ्रष्टाचार में लिप्त होंगे और न ही भ्रष्टाचार होने देंगे। फिर देखिए अंजाम क्या होता है। देश के विकास का और भ्रष्टाचारियों के विनाश का। पर ऐसा होना थोड़ा मुश्किल सा नजर आता है। मेरा मानना है कि अगर देश में बेहतर शिक्षा और समुचित इलाज निशुल्क कर दिया जाये तो भ्रष्टाचार पर अंकुश कुछ हद तक लग सकता है। क्योंकि दोनों ही स्थिति में आम आदमी समझौता करने से कतराता है और वो भ्रष्टाचार की तरफ हाथ फैलाता है।
मेरी बात तो यह है कि... जिस देश में गरीब आदमी अपनी रोजी-रोटी के लिए सड़क पर दूकान लगाने के लिए पुलिस को रिश्वत देता हो और अमीर आदमी उद्योग लगाने या ठेका लेने के लिए राजनेता और बड़े अधिकारियों को सुविधा शुल्क पहुंचाता हो उस देश में भ्रष्टाचार खत्म होना एक दिवास्वप्न सा लगता है। भारत में भ्रटाचार एक ऐसा 'साफ्टवेयर' डेवलप हुआ है जिसमें वायरस ही वायरस है। फिर भी यह अपनी रफ्तार से चल रहा है। दोस्तों ने पूछा इस साफ्टवेयर का क्या नाम रख दूं तो मैंने उसे सुझाया कि यह भारत का 'साफ्टवेयर' है इसका नाम अफजल या कसाब रख दो क्योंकि यह कभी 'हैंग' नहीं होगा।
लेखक परिचय: राजेश आनंद- उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, उत्तराखंड समेत छह राज्यों में प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका 'अराउंड द इंडिया' के संपादक हैं।












Click it and Unblock the Notifications