रामदेव-सरकार के बीच पुल बनें कमलनाथ

सूत्र बताते हैं कि कुछ दिनों पहले तक यूपीए सरकार पर अप्रत्यक्ष हमला बोलने वाले योग गुरु अब भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की पहल को सकारात्मक बताने में ऐसे ही नहीं लगे हैं। इसके पीछे कमलनाथ को बताया जा रहा है।
आपको बता दें कि कमलनाथ ही ऐसे पहले केंद्रीय मंत्री हैं जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ रामदेव के सत्याग्रह का समर्थन किया था और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना बयान दिया था। सूत्र बताते हैं कि इस बयान के बाद योगगुरु और कमलनाथ के बीच मन का मिलन हो गया और संभव है कि एक दूसरे के विचारों पर समर्थन के कारण वे काफी करीब आए। सूत्र बतातें है कि छिंदवाड़ा में बाबा और कमलनाथ की मुलाकात हुई।
कमलनाथ ने रामदेव के कार्यक्रम में शिरकत की। वहां कमलनाथ ने रामदेव से लंबी बातचीत करके उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की नीति और नीयत पर भरोसा करने के लिए राजी किया। बदले में स्वामी रामदेव ने इस मुद्दे पर सरकार से ठोस आश्वासन और कार्रवाई की मांग की। बताया जाता है कि इसके बाद कमलनाथ ने कांग्रेस नेतृत्व और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भरोसे में लिया। प्रणव मुखर्जी सक्रिय हुए। रामदेव की मुखर्जी से मुलाकात कराई गई।
सूत्र बतातें है कि रामदेव कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह से खासा नाराज हैं, पर उन्हें इस बार भरोसा दिया गया कि एक बार सरकार से मुद्दों पर सहमति के बाद सब ठीक हो जाएगा। पर बुधवार को एक बार फिर दिग्विजय सिंह ने उनपर हमला बोल दिया और कहा कि रामदेव को सरकार का समर्थन करना चाहिए न कि अनशन। उन्होंने कहा कि अनशन से कुछ भी नहीं होने वाला है। हालांकि अब भी उम्मीद की जा रही है कि तीन जून को होने वाली बैठक में बाबा के अनशन का काट खोज लिया जाएगा।
वहीं कुछ सूत्र बता रहे हैं कि सरकार ने रामदेव के साथ अच्छा संवाद होने के कारण पर्यटन मंत्री सुबोध कांत सहाय को विदेशी दौरे से वापस बुलाकर इस संकट को समाप्त करने के लिए एक सैनिक बनाकर उतार दिया। वैसे अभी अनशन में दो दिन बचे हैं। अब देखना है कि तीन तारीख को क्या सरकार रामदेव को मना पाती है या फिर रामदेव अपने महत्व को समझते हुए या यों कहें कि सरकार को झुकता देख अपना हठयोग जारी रखे और सरकार को कोई सर्व समाधान फार्मूला निकालने पर मजबूर कर दें।












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