स्पीक एशिया की खबरों को लेकर कंफ्यूज निवेशक
जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है, ना तो कंपनी की ओर से और ना ही सरकार की ओर से कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गयी है, हां इतना जरूर है कि उस टीवी चैनल ने चिल्ला-चिल्ला कर कंपनी के खातों को कुछ समय के लिए फ्रीज जरूर करवा दिया है लेकिन उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया है। जांच जारी है, अगर कोई कमी पायी जाती है तब ही एक्शन लिया जायेगा।
इसलिए फिलहाल स्पीक एशिया के धारकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। कंपनी लगातार अपना काम पूर्वनिर्धारित काम से ही कर रही है। उसके सर्वे फार्म लगातार उसकी साइट पर देखे जा सकते हैं। कंपनी का नाम जांच के दायरे में आने के बाद कुछ भारतीय बैंकों ने एहतियातन अपनी विश्वसनियता बनाये रखने के लिए अपने खाते स्पीक एशिया से जोड़ने को मना कर दिया है।
कुछ अखबारों में कंपनी के नाम पर फर्जीवाड़ा करने के लिए कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की बात कही गयी है। तो यहां भी हम अपने पाठकों को साफ कर दें कि जो भी एफआईआर की गई है वो कंपनी के खिलाफ नहीं बल्कि उन लोगों के खिलाफ है जिन्होंने कंपनी के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठे हैं। इसके पीछे कारण हम आपको बता दें कि इस ऑनलाइन सर्वे कंपनी में सबसे ज्यादा लोग उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़े हुए है, जहां पर इंटरनेट सर्विस कितनी ज्यादा लोकप्रिय है, इस बात को हमारे पाठकगण भंलि-भांति जानते हैं।
इस लिए कुछ लोगों ने धारकों से, ये कह कर कि आप हमें पैसे दो हम आपकी तरफ से स्पीकएशिया में लगा देगें क्योंकि हमारे पास इंटरनेट सुविधा उपलब्द्ध है, पैसे ले लिए लेकिन उन्होंने पैसे कंपनी में ना लगाकर अपने पास रख लिए। जिनके खिलाफ देश के कुछ शहरों में मामले दर्ज हुए हैं। इसलिए फर्जीवाड़ा कंपनी ने नहीं बल्कि कुछ अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों ने किया है। कंपनी का इन बातों से कोई लेना-देना नहीं है।
इसलिए स्पीकएशिया के धारकों और पाठकों से अनुरोध ये है कि वो आंख-कान खोलकर खबरों को देखें। जब तक कोई जांच रिपोर्ट ना आ जाये तब तक उन्हें भ्रमित होने की जरूरत नहीं है।
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