किसानों के साथ भद्दा मजाक, 3 रूपये का मुआवजा

10 सितंबर को यमुना में आई भयंकर बाढ़ से क्षेत्र के जहां दर्जनों गांव पानी में डूब गए थे, वहीं इन गावों के किसानों की हजारों एकड़ फसल भी बाढ़ के पानी की भेंट चढ़ गई थी। इस दौरान सरकार ने बर्बाद फसल का मुआवजा दिए जाने की घोषणा की थी। अब सरकार ने मुआवजे की राशि भेजी है, लेकिन सरकार का मुआवजा रूपी मरहम पाकर किसानों के जख्म कम होने की बजाय और बढ़ गए हैं। कम राशि होने से कई किसानों इस राशि को लेने से इंकार कर दिया है।
मुआवजे को प्रशासन ने अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। इस श्रेणियों में 1 से 25 प्रतिशत तक खराब हुई फसल का कोई मुआवजा दिए जाने का प्रावधान नहीं है। जबकि 26 से 50 प्रतिशत तक प्रति एकड़ धान की फसल का 35 सौ रुपए व अन्य फसलों का 25 सौ रुपए मुआवजा दिया जा रहा है। इसके अलावा 51 से 75 प्रतिशत तक बर्बाद धान की फसल का 45 सौ रुपए व अन्य फसलों का प्रति एकड़ 35 सौ रुपए, 76 से 100 प्रतिशत तक बर्बाद धान की फसल का 55 सौ रुपए व अन्य फसलों का प्रति एकड़ 45 सौ रुपए मुआवजा दिया जा रहा है। नाममात्र मुआवजा राशि को लेकर किसानों में सरकार के प्रति रोष बना हुआ है। शुक्रवार को सनौली गांव में ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में किसान अनिल, सतपाल, हरिराम, विनोद, सुनील, अशोक समेत सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
बिजेंद्र ने धान की फसल पर 25 हजार रुपए खर्च आया था। सरकार ने उसको इतनी बड़ी राशि के आगे तीन रुपए का मुआवजा देकर राहत के नाम पर मजाक किया है। इसी तरह गांव सनौली खुर्द में किसान संजय, अनिल और प्रकाश, लाल सिंह, लख्मी को भी मुआवजा राशि भेजी है। गांव तामशाबाद के किसान करतार, महा सिंह, गजे सिंह, अजमेर ने बताया कि मुआवजा राशि न के समान है।
फसल पर हजारों खर्च के बाद किसानों को राहत के नाम तीन से सौ रुपए दिए जा रहे हैं। बापौली के नायब तहसीलदार उमराव सिंह ने बताया कि सरकार की हिदायत अनुसार बाढ़ में बरबाद फसल की गिरादावरी की गई थी। उसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी थी। उच्चाधिकारियों के दिशा निर्देश अनुसार किसानों को मुआवजा राशि दी जा रही है।












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