आतंक की अलग ही नस्ल है डेविड हेडली

उसने पाकिस्तान में छह आतंकवादी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में भाग लिया और बन गया आतंकियों की दुर्लभ नस्ल। वर्ष 2000 में डेविड हेडली ने पाकिस्तान के एक मस्जिद में एक भर्ती पोस्टर पर एक फोन नंबर देखा। उसने फोन मिलाया और आतंकवादी के रूप में अपने दशक पुराने कैरियर की उसी समय शुरुआत की। मुंबई हमले में अपनी भूमिका स्वीकारने वाले मृदुभाषी पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी शख्स के लिए यह सिर्फ आतंकियों के साथ एक बैठक मात्र थी। लेकिन इसी बैठक ने उसे ऐसा आतंकी बना दिया जो अन्य आतंकियों की प्रजाति से भिन्न था।
अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआइ के हत्थे चढ़े डेविड हेडली ने 2010 में कबूल किया कि उसने मुंबई पर हमले के लिए जमीन तैयार की थी। अब वह शिकागो की अदालत में अपने दोस्त और बिजनेस पार्टनर तहव्वुर हुसैन राणा के खिलाफ गवाही दे रहा है। राणा पर आरोप है कि उसने हेडली को मुंबई में विभिन्न स्थानों की रेकी के दौरान सुरक्षा छतरी मुहैया कराई थी। राणा ने हालांकि अपनी भूमिका से इंकार किया है।
हेडली के बारे में एक रोचक बात बता दें कि वह जहां कहीं भी जाता खुद हाथ में कलावा (हिंदुओं की निशानी) और बैग में एक ईसाई धर्म से संबंधित एक किताब रखता था। उसने साल 2006 में अपना नाम दाऊद गिलानी से बदलकर डेविड कोलमैन हेडली रख लिया था। लेकिन आखिरकार 2009 में उसकी यात्रा ने ही उसे पकड़वा दिया। अमेरिकी अधिकारी डेविड नाम के एक अंतरराष्ट्रीय भ्रमण करने वाले इंसान की तलाश में थे। अगस्त 2009 में हेडली कस्टम अधिकारियों के हत्थे चढ़ा। इसके बाद एफबीआइ उसके पीछे लग गई और 7 सितंबर को उसे धर-दबोचा।
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