अब भुल्‍लर को मिली फांसी की सजा पर शुरु हो गई राजनीति

Bhullar
दिल्‍ली। 1993 में दिल्‍ली में हुए बम ब्‍लास्‍ट के मामले में दोषी देवेन्‍द्र पाल सिंह भुल्‍लर की दया याचिका खरिज होते ही अब राजनीतिक सियासत शुरु हो गई है। अ‍काली दल ने उसे फांसी की सजा न देने की गुहार लगाई है। अकाली दल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर पूरे मामले में हस्‍तक्षेप करने को कहा है। अकाली दल ने मांग किया है कि भुल्लर की फांसी मानवता के आधार उम्रकैद में तब्दील कर दिया जाना चाहिए।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह ने भी अकाली दल की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने भी मांग की है कि उसे फांसे देने की बजाय पूरी जिंदगी जेल में रखना चाहिए। उल्लेखनीय है कि राष्‍ट्रपति ने दो दिन पहले भुल्‍लर की दया याचिका खारिज कर दी थी। भुल्‍लर को 2001 में मौत की सजा सुनाई गई थी। अगर भुल्लर को फांसी हो ती है तो देश में 2004 के बाद वह पहला कैदी होगा, जिसे फांसी दी जाएगी। इससे पहले धनंजय चटर्जी को 14 अगस्त 2004 को फांसी दी गई थी।

भुल्‍लर को 1993 में राजधानी के रायसीना रोड पर बम विस्फोट करने का दोषी ठहराया गया है। इस विस्‍फोट में कांग्रेस नेता एमएस बिट्टा घायल हो गए जबकि 9 लोगों की मौत हो गई थी। संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति मौत की सज़ा को आजीवन क़ैद में बदल सकते हैं। इसके लिए सज़ा पाए व्यक्ति को स़िर्फ एक दया याचिका राष्ट्रपति के पास देनी होती है। इस अनुच्छेद में दया याचिका पर निर्णय लेने के लिए किसी समय सीमा या दिशा-निर्देश का उल्लेख नहीं है।

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