बाल ठाकरे की हत्या करने वाला था हेडली

पाकिस्तानी पिता और अमेरिकी मां की संतान हेडली ने हमले के लिए मुंबई में ठिकानों की खुफिया जानकारियां जुटाई थीं। इनमें शिवसेना मुख्यालय भी था। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआई और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने ठाकरे की हत्या की योजना बनाई थी। वे शिव सेना से बहुत घृणा करते हैं, उसे आतंकी संगठन मानते हैं। हेडली ने अदालत में दिए अपने बयान के दौरान यह भी बताया कि उसने किस तरह मुंबई में चिह्नित ठिकानों के विवरण पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और आइएसआई के लोगों तक पहुंचाया।
हेडली ने बताया कि उसने कई ईमेल तहव्वुर हुसैन राणा, आइएसआई के मेजर इकबाल और लश्कर के साजिद को भेजे थे। इससे जाहिर होता है कि ये लोग हेडली से सीधे संपर्क में थे। हेडली ने कहा कि हमले की साजिश रचने में आइएसआई, उसके संचालक मेजर इकबाल के साथ-साथ लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज मुहम्मद सईद ने मदद की और उसे जिहाद के लिए उकसाया। सईद ने उससे कहा कि जिहाद में शामिल होना सौ साल की इबादत के बराबर है। हेडली मौत की सजा से बचने के लिए राणा के खिलाफ गवाही देने को तैयार हुआ है। मालूम हो कि पाकिस्तान में सैनिक स्कूल से राणा और हेडली की दोस्ती हुई थी।
हमने ऐसे सैकड़ों हेडली देखें हैं: बाल ठाकरे
मौत की सजा से बचने के लिये हेड़ली ने जब अदालत के सामने सच कबूलना शुरु किया तो कई राज बेपर्दे हो गये। बाल ठाकरे की हत्या की साजिश रचने की बात सामने आई तो पूरा शिव सेना खलबला गया। अब सवाल यह उठता है कि बाल ठाकरे कैसे चुप रह सकते हैं। तो हुआ ऐसा ही और आखिरकार उन्होंने बोल ही दिया। इस पूरे वाक्या पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए बाल ठाकरे ने कहा कि मैने ऐसे सैकड़ों हेड़ली देखे हैं और हत्या तो दूर हेड़ली की इतनी अवकात नहीं थी कि वह मुझ तक पहुंच सके।
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