बड़े कोचिंग संस्थानों को सुपर-30 का तमाचा, आईआईटी में सेलेक्ट हुए 24 छात्र

बिहार पढ़ाई का गढ़ हमेशा से माना जाता है। यह बात सुपर-30 ने भी सिद्ध कर दी है कि उनसे अच्छा कोई नहीं। बेहतरीन परिणामों पर खुशी जताते हुए कोचिंग संस्थान के निदेशक कुमार आनंद ने बताया कि सभी चयनित छात्र गरीब वर्ग के हैं। आनंद के मुताबिक कोचिंग से पास होने वाला एक छात्र ट्रक चालक का बेटा है, जबकि एक छात्र वाराणसी का है, जिसके पिता का दस साल पहले निधन हो गया। सुपर 30 के सफल छात्रों ने मीडिया से बातचीत में अपनी सफलता का श्रेय कोचिंग के संस्थापक श्री आनंद को दिया।
गौरतलब है कि यह कोचिंग पिछले 9 साल से चल रही है, जहां हर साल 30 छात्र आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते हैं। अब तक यहां से 212 छात्र सफल हो चुके हैं।
इस भौतिक वादी एवं बाजारवादी दौर में इस कोचिंग ने बड़ी मिसाल कायम की है। सच पूछिए तो इस कोचिंग ने उन कोचिंग संस्थानों को नीचा दिखा दिया जो सालाना 1 लाख से 2 लाख रुपए फीस लेने के बाद 1000 में से दस या पंद्रह छात्रों को ही आईआईटी के गेट तक पहुंचा पाते हैं।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के काउंसिलर एवं लखनऊ के श्री जयनारायण पीजी कॉलेज के रीडर डा. आलोक चांटिया से हमने कोचिंग संस्थान के बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि सही मायने में कुमार आनंद भारत के अमूल्य रत्न हैं। सही मायने में बिहार सरकार को उन्हें राज्य के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित करना चाहिये। डा. चांटिया ने कहा कि सुपर-30 की यह सफलता देश भर के उन कोचिंग संस्थानों के मुंह पर तमाचा हैं, जो शिक्षा का व्यवसायीकरण कर रहे हैं।












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