सुहाग की निशानी तक उतरवा ली गई कनीमोझी से

कोर्ट रूम में उनके पति अरविंद, टेलीकॉम घेटाले के सूत्रधार और दुनिया के दूसरे सबसे बड़े घोटालेबाज ए राजा और कनीमोझी की मां एक साथ ही बैठे थे। अगर प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो बीच-बीच में वो कभी अपने पति से बात करतीं और साथ ही ए राजा से भी सवाल-जवाब कर रही थीं। कोर्ट रूम में पहुंचने वाले तमाम डीएमके समर्थकों को वो सिर्फ नमस्कार में जवाब दे रही थीं। इस वक्त और साफ नजर आया कि कनिमोझी किसी से बात नहीं करना चाहती।
दोपहर ढाई बजे के करीब जब जज कोर्ट रूम में पहुंचे तो अचानक गहमागहमी बढ़ गई। जज ने बेहद धीरे बोलते हुए अपने फैसले में सिर्फ दो बातें कहीं- कनिमोझी और शरद कुमार की याचिका खारिज की जाती है। दोनों को हिरासत में ले लिया जाए। जज की ये बात सुनते ही कनिमोझी का चेहरा सन्न पड़ गया। उन्होंने पति का हाथ थाम लिया।
हिरासत में लेने के बाद कनिमोझी को कोर्ट रूम के बाहर लाया गया। कॉरिडोर में पहुंचने के बाद सामने ही लॉकअप का दरवाजा था। यहां कनिमोझी खुद को संभाल नहीं पाईं। वो पति अरविंद के गले लगकर रोने लगीं। अरविंद की आंखों में भी आंसू छलक आए। ये देखकर वहां मौजूद डीएमके समर्थक भी जोर-जोर से रोने लगे। सभी को ऐहसास था कि अब क्या होने जा रहा है। कनिमोझी को लॉकअप में ले जाने से पहले कहा गया कि वो सभी गहने उतार दें।
उन्होंने बाकी गहने तो दे दिए लेकिन नाक की कील उतारने से मना कर दिया। हवाला दिया कि उसे सुहाग की निशानी कहा जाता है। इसे मत लीजिए। कनिमोझी की बात का समर्थन करने के लिए उनके पति अरविंद भी पुलिसवालों को समझाने लगे लेकिन कनिमोझी को साफ कह दिया गया कि नाक की कील तो उतारनी ही पड़ेगी। बड़े ही बेमन से कनिमोझी ने ये बात मानी और कील उतारकर पुलिसवालों को दे दी तब उन्हें लॉकअप के अंदर ले जाया गया।
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