अटल, ममता, माया..पर मेहरबान ..नंबर 13

उसके बाद वो 13 दलों के साथ 2004 में प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठे और पांच साल तक सफल राज किया। कहना गलत ना होगा कि 13 नंबर अटल जी के लिए काफी लकी है। खुद अटल जी ने लखनऊ के मंच पर कहा था कि अक्सर लोग कहते हैं कि आदमी के मरने के बाद 13 दिन का श्राद्ध किया जाता है, ताकि उसकी आत्मा को शांति मिले। लेकिन मुझे शांति तो अपने जीते जी मिल गयी है क्योंकि 13 पार्टी के सपोर्ट से मैं दिल्ली पहुंचा हूं, इसलिए मै अपने लिए 13 नंबर को काफी लकी मानता हूं।
दूसरा नाम आता है यूपी की मुख्यमंत्री मायावती का जो खुद सत्तासीन हुई 13 मई 2007 को, हालांकि वो इससे पहले भी मुंख्यमंत्री के पद पर रह चुकी थी लेकिन 2007 में जब वो वापस आयीं तो उन्हें किसी सहारे की जरूरत नहीं थी। भले ही विपक्ष कितना हल्ला मचाये लेकिन वो उनका कुछ बिगाड़ नहीं पाया है और लगातार 9 सालों से वो यूपी की सत्ता की मालकिन हैं। मायावती ने जब पहली बार यूपी में सीएम बनने की कवायद की थी तो उस दिन भी 13 तारीख ही थी। खैर माया के सफर को आप खुद ही देख रहे हैं, अंदाजा लगा सकते हैं कि माया के लिए भी 13 नंबर लकी है।
अब बात करते हैं आज आये चुनाव परिणाम की। बंगाल में आज एक ऐतिहासिक परिणाम सामने आया है, ममता की तृणमूल कांग्रेस ने आज बंगाल में पिछले 34 सालों से बनें वामदल के किले को ध्वस्त कर दिया है। आपको बता दें कि 13 मई 1998 को ही ममता ने अपनी पार्टी का निर्माण किया था। जिस नारे को आधार बनाकर ममता ने चुनाव जीता है वो नारा है...मां, माटी और मानुष या Maa, mati, Manush यानी की 13 अक्षर । और आज भी सौभाग्य से 13 मई ही है यानी की ममता के लिए भी 13 तारीख लकी साबित हुई है।
एक बात और जिन तीन नेताओं का जिक्र यहां हुआ है उन तीनों की ही शादी नहीं हुई हैं। तीनों ने अपना मन, धन और कर्म राजनीति को सौंप दिया है । तीनों ही नेता भारतीय राजनीति के इतिहास में अपना अलग मुकाम रखते हैं, क्योंकि इन तीनों ने ही नये इतिहास को जन्म दिया है। इसलिए 13 नंबर हमेशा अनलकी होता है ये कहना हमेशा सही नहीं होता।












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