ग्रेटर नोएडा में राहुल गांधी की नौटंकी

Rahul Gandhi
ग्रेटर नोएडा। 'जिसका मुझे था इंतजार, जिसके लिए दिल था बेकरार, वो घड़ी आ गई, आ गई....' यही फिल्‍मी गाना इस समय 44 डिग्री तापमान में ग्रेटर नोएडा के भट्टा परसौल गांव की जमीन पर तपती धूप में धरने पर बैठे राहुल गांधी मन ही मन गुनगुना रहे होंगे। आखिर क्‍यों ना गायें, उनकी नौटंकी का सही समय जो आ गया है। यह वो नौटंकी है, जिसमें कांग्रेस के युवराज ने शोले के उस डायलॉग- लोहा गरम है, मार दो हथौड़ा... का भी पूरा ध्‍यान रखा। राहुल गांधी के फैन्‍स, उनके हिमायती व कांग्रेस से जुड़े लोग यह पढ़ कर जरूर गाली देंगे, लेकिन यह वो कड़वा सच है, जिसे पीना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।

गे भट्टा परसौल गांव पहुंचे राहुल गांधी की यह राजनीतिक नौटंकी नहीं तो क्‍या है। ग्रेटर नोएडा से आगरा को जोड़ने वाले यमुना एक्‍सप्रेस वे का काम पिछले साल शुरू हुआ, तब से लेकर आज तक व्‍यथित किसान दर-दर भटक रहे थे। तब राहुल को उनकी परवाह नहीं रही। आज जब वे किसान आंदोलन की आग में कूद पड़े तो राहुल भी उसमें पहुंच गये। हमारा पहला सवाल- राहुल पिछले एक साल से क्‍या कर रहे थे?

ग्रेटर नोएडा की इस परियोजना पर किसानों को जमीन के बदले मकान व मुआवज़ा दिया जाना है। इस तरह का विधेयक केंद्र में लंबित भी पड़ा है। अगर राहुल को किसानों की इतनी ही चिंता है, तो केंद्र पर उस विधेयक को पारित करने के लिए दबाव क्‍यों नहीं बनाते? अगर वे दबाव नहीं बना सकते हैं, तो वे काम के नहीं सिर्फ नाम के युवराज हैं।

बात अगर देश भर के किसानों की करें तो हम बहुत पीछे नहीं जायेंगे। 2006 में पूरे भारत में 17,060 किसानों ने आत्‍महत्‍या की। 2008 में 16,196 किसानों ने मौत को गले लगाया। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड के मुताबिक 2005 से 2009 तक पांच हजार से अधिक किसानों ने सिर्फ महाराष्‍ट्र में आत्‍महत्‍या की। 2005-07 में आंध्र प्रदेश में 1,313 मामले आये, यही नहीं कर्नाटक, हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश से लेकर तमिलनाडु तक हर साल किसान द्वारा आत्‍महत्‍या के मामले दर्ज हो रहे हैं।

भट्टा परसौल की तस्‍वीर को देख कर तो यही लगता है, कि राहुल गांधी ऐसे किसानों के पास इसलिए नहीं जाते, क्‍योंकि वहां उन्‍हें पब्लिसिटी नहीं मिलती। किसान आत्‍महत्‍या नहीं करें, इसके लिए या फिर किसानों के आर्थिक विकास के लिए क्‍या कभी राहुल गांधी तपती धूप में धरने पर बैठे हैं?

अगर राहुल इन सवालों के जवाब नहीं दे सकते हैं, तो सच में भट्टा परसौल में वो जो कुछ कर रहे हैं, वो नौटंकी मात्र है। हम इस नौटंकी को अगले साल होने वाले उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से नहीं जोड़ेंगे, क्‍योंकि उसके लिए वोट बैंक मजबूत करना उनका काम है और उसके लिए वो कुछ भी कर सकते हैं।

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