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ओसामा को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था..

Osama Bin Laden
वाशिंगटन। दस वर्षों तक दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका को चकमा दे चुके 9/11 के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पकड़ना इतना आसाना नहीं था। लादेन को पकड़ने के लिए अमेरिका को बड़ी ही कूटनीति और सतर्कता से अपनी योजना बनानी पड़ी। एबटाबाद में लादेन के घर के पास बने एक मकान से अमेरिकी जासूसों ने महीनों तक लादेन पर नजर रखी और ओसामा को धर दबोचा।

कैसे कसा ओसामा पर शिकंजा-

ओसामा पर शिकंजा कसने के लिए अमेरिकी जांच एजेंसी सीआईए ने अपने काबिल जासूसों और मुखबिरों की टीम बनाई और उन्हें एबटाबाद में ओसामा के घर के पास बने एक मकान में रखा। इन मुखबिरों का काम लादने की एक-एक हरकत पर नजर रखना था। ओसामा के मकान में एक पत्ता भी खड़कता तो इसकी सूचना अमेरिका को पहुंच जाती।।


कभी जमीन तो कभी आसमान से नजर-

ओसामा के घर पर नजर रखना जमीनी तौर पर सबसे बड़ा मसला था। पिछले साल अगस्त में अमेरिका को खबर लग गई थी कि ओसामा पाकिस्तान में छुपा बैठा है। लादेन के घर का पता लगाने के लिए अमेरिका ने सैटेलाइट का इस्तेमाल किया। इससे उसके घर की ना सिर्फ तस्वीरें ली गईं बल्कि अमेरिका ने कोशिशि की लादेन के घर में होने वाली आवाजों को भी रिकार्ड किया जा सके।

अमेरिका को बहुत मंहगा पड़ा लादेन-

अमेरिकी जांच एजेंसी सीआई के लिए ओसामा की ढूंढना करना इतना मंहगा था कि पिछले साल दिसंबर में सीआईए को अमेरिकी कांग्रेस के पास जाना पड़ा और उसने लादेन को ढूंढने के लिए 10 मिलियन अतिरिक्त डॉलर की मांग की। सीआईए के आधुनिक इतिहास में ये सबसे बड़ा ऑपरेशन है जिसमें एक आदमी को पकड़ने के लिए इतने सारे गुप्तचरों और तमाम तरह के संसाधनों की मदद ली गई। इस ऑपरेशन में पाकिस्तानी जासूस भी शामिल थे। ऑपरेशन ओसामा को पूरा करने में इन जासूसों का बहुत बड़ा हाथ रहा।

बिन लादेन के आखिरी क्षण

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक जब 1 मई की रात को करीब 1 बजे लादेन के घर पर हमला किया गया तो अमेरिकी फौज ने लादेन को बिल्डिंग की तीसरी मंजिल के दरवाजे पर देखा। इसके बाद लादेन खुद को बचाने के लिए पीछे कमरे की तरफ पलटा मगर तबतक उसको दो गोलियां मारी जा चुकी थीं एक सिर पर और दूसरी छाती पर।

इसके बाद अधिकारियों ने उसके कमरे से एक एके-47 और एक पिस्तौल बरामद की। कुछ रिपोर्टों में ये भी कहा गया है कि लादेन ने खुद को बचाने के लिए अपनी पत्नी का सहारा लिया और अधिकारियों को लादने को मारने के लिए पहले उसकी पत्नी के पैर पर गोली मारनी पड़ी।

लादेन ने आखिर एबटाबाद ही क्यों चुना..

पूरी दुनिया में सवाल उठाए जा रहे हैं कि खुद को अमेरिका की नजरों से बचाए रखने के लिए लादेन ने एबटाबाद को ही क्यों चुना। क्या उसे लगता था कि यही वह जगह है जहां पर वो जिंदा रह सकता है और अमेरिका की नजरों से भी बचा रह सकता है। एबटाबाद के जिस मकान में लादेन छुपा था उससे महज एक किमी दूर पाकिस्तानी सेना की छावनी थी।

क्या इससे ये नहीं लगता कि पाक सेना ने ही ओसामा को अपने दिल के करीब जगह दे रखी थी। अगर नहीं तो ओसामा वहां तक पहुंचा कैसे..पाकिस्तान को ये जवाब तो देना ही पड़ेगा।

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