शेखर तिवारी की उम्रकैद ने डाला मायावती के जश्‍न में खलल

Mayawati
लखनऊ। मनोज गुप्‍ता हत्‍याकांड का फैसला आते ही प्रदेश सरकार के जश्‍न में खलल पड़ गई। फैसला ऐसे समय में आया जब उत्‍तर प्रदेश की मायावती सरकार अपनी चार साल की उपलब्धियों का जश्‍न मनाने की तैयारी में है। मालूम हो कि इस महिने के 13 तारीख को मायावती सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं। उत्‍तर प्रदेश सरकार अबतक यह भूल चुकी थी कि ऐसे भी कालिख उनके झोली में हैं। उन कालिखों पर लम्‍बे समय से धूल पड़ जाने के कारण सरकार सुकून में थी कि अचानक इस फैसले ने चेहरे की हवाईयां उड़ा दी।

इंजीनियर हत्‍याकांड से लेकर शीलू बलात्‍कार प्रकरण ने विपक्ष पार्टियों को फिर से हमलावर होने का मौका दे दिया है। अब विपक्ष पार्टियों का कहना है कि सरकार को जश्‍न नहीं शर्म दिवस मनानी चाहिए। सरकार के जश्न वाले दिन काला दिवस जैसे आयोजन का खाका तैयार किया जाने लगा है। यानी आने वाले दिन सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं। बातते चलें कि उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित इंजीनियर मनोज गुप्ता हत्याकांड में शुक्रवार को लखनऊ की विशेष कोर्ट ने अपनी फैसला सुनाते हुए विधायक शेखर तिवारी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

विधायक के साथ ही उसकी पत्नी विभा तिवारी को भी ढ़ाई साल की सजा सुनायी गयी है। इसके साथ ही शेखर तिवारी समेत 11 लोगों इस हत्याकांड के लिए दोषी करार दिया गया हैं। उल्‍लेखनीय है कि 24 दिसंबर साल 2008 में औरेया के PWD के इंजीनियर मनोज गुप्ता की पीट-पीट कर हत्या कर दी गयी थी, ये हत्या इसलिए की गयी थी कि क्योंकि मनोज ने मुंख्यमंत्री मायावती के जन्मदिन को लिए चंदा देने से मना कर दिया था।

जिसके बाद बसपा विधायक शेखर तिवारी और उनके लोंगों ने मनोज को पीट-पीट कर मार डाला था। इस केस की सुनावई पिछले दो साल से चल रही थी, पहले औरेया कोर्ट में इसकी सुनवायी हुई थी लेकिन बाद में जब ये हाईप्रोफाइल केस बन गया तो इस केस की सुनावाई लखनऊ की विशेष अदालत को सौंप दी गयी।

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