हाईटेक उपकरण फेल, ग्रामीणों ने ढूंढा दोरजी खांडू का शव

ऐसा नहीं कि यह बात सिर्फ भारतीय हाईटेक व्यवस्था को ओछा करने के लिये कही जा रही है बल्कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के पूर्वी क्षेत्र के प्रमुख एमएस भुर्जी ने इस बात को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि हवाई सर्वेक्षण तथा उपग्रह से मिले चित्रों के आधार पर हम सेला दर्रे के दक्षिण-पश्चिम इलाके में अभियान केंद्रित कर रहे थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने मलबा सेला के उत्तर-पूर्व में ढूंढ़ निकाला। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर का मलवा और खांडू का शव हवाई सर्वे द्वारा नहीं खोजा गया। भुर्जी ने कहा कि जिन ग्रमीणों ने खांडू के शव को ढूंढा वह न तो प्रशिक्षित थे और न ही आधुनिक उपकरणों से लैस।
प्रदेश सरकार ने खांडू को यात्रा के लिये दी थी वेक्ट्रा हेलीकॉप्टर फिर पवन हंस कैसे?
प्राप्त जानकारी के अनुसार सीएम दोरजी खांडू जिस हेलीकॉप्टर में थे उसका पंजीकरण भी पिछले साल जुलाई माह में किया गया था। जानकारों का कहना है वह हेलीकॉप्टर एक इंजन वाला था जो पहाड़ी व घने जंगलों में उड़ान के लिये योग्य नहीं था। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय में एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि एक जून को जारी नए नियमों के अनुसार एकमात्र इंजन वाले हेलीकॉप्टर की उड़ान केवल उन क्षेत्रों में की जानी चाहिए, जहां हेलीकॉप्टर उतारने की सुविधा हो। उन्होंने बताया, नए नियम यह भी बताते हैं कि एक इंजन वाले हेलीकॉप्टर की उड़ान रात या खराब मौसम में नहीं की जानी चाहिए।
अपवाद केवल वहीं हो सकता है, जहां दृश्यता बहुत अधिक और सामान्य से अच्छी हो। वहीं दूसरी तरफ पवनहंस के अधिकारी ने कहा कि उन्होंने हेलीकॉप्टर अरुणाचल प्रदेश सरकार को पट्टे पर दिया था, न कि मुख्यमंत्री की यात्रा के लिए। उनके लिए दो इंजन वाला ग्लोबल वेक्ट्रा हेलीकॉप्टर दिया गया था, लेकिन किस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल वह करें, यह उनका फैसला था।












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