फ़लस्तीनी प्रतिद्वंदी फ़तह-हमास के बीच समझौता

समझौते के तहत सरकार के बनने के बाद चुनाव करवाए जाने के लिए एक तारीख़ मुकर्रर कर दी जाएगी. ये घोषणा अचानक से मिस्र में की गई. मिस्र काफ़ी सालों से दोनों प्रतिद्वंदियों के बीच समझौता करवाने की कोशिश करता रहा है. दोनों गुटों के बीच लगभग चार सालों से लड़ाई जारी है और जहाँ फ़लस्तीन के गज़ा पट्टी के इलाक़े पर हमास का कब्ज़ा है वहीं फ़तह की मौजूदगी पश्चिमी तट पर है.
अनपेक्षित सफ़लता
क़ाहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता जोनाथन हेड का कहना है कि ये दोनों गुटों को क़रीब लाने की बहुत सारी कोशिशों की नाकामयाबी के बाद मिली एक अनपेक्षित सफलता है. जोनाथन हेड का कहना है कि दोनों गुटों के बीच झगड़े का ख़ात्मा फ़लस्तीन को राष्ट्र के तौर पर मान्यता दिलाने के अभियान में मौजूद एक बहुत बड़ी रूकावट को ख़त्म कर देगा.
क़ाहिरा में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए फ़तह प्रतिनिधिमंडल के अज़्ज़ाम अल-अहमद ने कहा, "हमें इस बात पर गर्व है कि हम क़ौम की इच्छानुसार अपने मतभेदों को ख़त्म करने की हिम्मत रखते हैं ताकि हम फ़लस्तीन पर क़ब्ज़े को ख़त्म करने में कामयाब हो सकें. इतिहास में ये ऐसा अंतिम क़ब्ज़ा है."
मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में हो रहे आंदोलनों से प्रेरित होकर हज़ारों फ़लस्तीनियों ने इसी माह गज़ा में विरोध रैलियाँ निकालकर दोनों गुटों में समझौते की मांग की थी. अज़्ज़ाम अल-अहमद ने कहा कि हम एक ऐसी साझा सरकार बनाएंगे जिसमें निष्पक्ष लोगों को शामिल किया जाएगा जो राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों के लिए तैयारी शुरु कर देंगें.
शांति
पिछले माह के प्रर्दशनों के दौरान फ़लस्तीनियों ने हमास और फ़तह से मतभेदों को ख़त्म करने की मांग की थी. उन्होंने कहा कि ये चुनाव अगले आठ महीनों के दौरान होंगे. हमास के उप प्रमुख मुसा अबु मरज़ोक ने प्रेसवार्ता में कहा, "हमारे बीच मौजूद दरार ने फ़लस्तीन पर क़ब्ज़े को जारी रखने का मौक़ा दिया. हम आज एक नया अध्याय शुरु कर रहे हैं."
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंन्यामिन नेतनयाहू ने फलस्तीनी प्रशासन (फ़तह) से कहा है कि वो इसराइल और हमास दोनों के साथ शांति का समझौता नहीं बनाए रख सकता है क्योंकि हमास इसारइल का विनाश करना चाहता है और वो ये खुलकर बोलता है. अमरीकी की राष्ट्रीय रक्षा समिति के प्रवक्ता टॉमी विटोर ने कहा है कि अमरीका फ़लस्तीनी समझौते का इस शर्त पर समर्थन करता है कि वो शांति को बढ़ावा दे.
हालांकि उन्होने कहा कि हमास एक आतंकवादी संस्था है जो आम शहरियों को निशाना बनाता है. शांति को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी है कि फ़लस्तीन में जो भी सरकार बने वो हिंसा को त्यागे, पुराने संधियों का सम्मान करे और इसराइल के अधिकारों को स्वीकार करे.












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