अप्रत्‍यक्ष रूप से प्रधानमंत्री ने की राजा की सहायता

Manmohan Singh
नई दिल्ली। 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच कर रही संसद की लोक लेखा समिति की मीडिया में लीक हुई मसौदा रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा को 'अप्रत्यक्ष रूप से हरी झंडी' देने पर उनकी आलोचना की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक इसके चलते ए. राजा ने दुर्लभ रेडियो तरंगों को कम कीमतों में बेचने का 'अनुचित एवं संदिग्ध तरीका' अपनाया।

मसौदा रिपोर्ट लोक लेखा समिति द्वारा स्वीकार की जानी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजा जो इस समय जेल में हैं उन्होंने 'अपनी गुप्त कार्यप्रणाली को छुपाने के लिए आधा सच ही बयां किया है।' रिपोर्ट में वर्ष 2008 में दूरसंचार लाइसेंस की बिक्री से देश को हुए कथित नुकसान के लिए मनमोहन सिंह को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।

लोक लेखा समिति की इस रिपोर्ट को जांच समिति में शामिल 22 सदस्यों की अभी मंजूरी मिलनी है लेकिन इसके एक दिन पहले यह रिपोर्ट मीडिया में लीक हो गई। रिपोर्ट में हालांकि प्रधानमंत्री की आलोचना की गई है। प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए रिपोर्ट कहती है कि समिति ने 'घटनाओं के क्रम की जांच की है जो कुछ दुर्भाग्यपूर्ण चूक को प्रमाणित करते हैं।' रिपोर्ट में प्रमुखता से यह बताया गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने किस तरह 'असाधारण तरीके' से राजा द्वारा 26 दिसम्बर 2007 को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र पर कार्रवाई की।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि यह पत्र प्रधानमंत्री को सात जनवरी 2008 को सौंपा गया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पत्र को 12 दिनों तक अपने पास रखा। इसके चार दिनों बाद प्रधानमंत्री के निजी सचिव ने संदेश अग्रसारित किया कि प्रधानमंत्री की 'लाइसेंस आवंटन के मुद्दे से सम्बंधित घटनाक्रम को जानने की इच्छा है।' रिपोर्ट के मुताबिक यह लाइसेंस आवंटन के एक दिन बाद 10 जनवरी 2008 को हुआ।

गत 15 जनवरी को प्रधानमंत्री के निजी सचिव ने पत्र लिखा कि प्रधानमंत्री दूरसंचार मंत्रालय के साथ अनौपचारिक बातचीत करना चाहते हैं और वह औपचारिक चर्चा नहीं करना चाहते। वह चाहते हैं कि इस मामले से प्रधानमंत्री कार्यालय निपटे।

रिपोर्ट के मुताबिक, "मंत्री के पत्र को स्वीकार कर प्रधानमंत्री ने एक तरीके से उन्हें अपनी योजना और निर्णयों के साथ आगे बढ़ने की अपनी अप्रत्यक्ष रूप से अनुमति दे दी.. दूरसंचार मंत्रालय को प्रधानमंत्री कार्यालय के हवाले छोड़ प्रधानमंत्री ने दूरसंचार मंत्री की अप्रत्यक्ष रूप से मदद की जिसके चलते वह अपने अनुचित, मनमाने और संदिग्ध कार्यप्रणालियों से लाइसेंस का आवंटन करने के लिए आगे बढ़े।"

समिति में शामिल कांग्रेस सदस्य के.एस. राव ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, "ऐसा मालूम पड़ता है कि सरकार को अस्थिर करने के लिए जोशी के पास कोई छुपा एजेंडा है। लगता है कि मसौदा रिपोर्ट को दुर्भावनापूर्ण और पक्षपात के ध्येय के साथ पूर्व नियोजित ढंग से तैयार की गई है।" राव के साथ डीएमके और उनकी पार्टी के अन्य सदस्य मौजूद थे। समिति के एक सदस्य ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, "प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका जांच के घेरे में है, लेकिन प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह) नहीं।"

रिपोर्ट में केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम की भूमिका की भी आलोचना की गई है, जो 2008 में जब स्पेक्ट्रम बेचा गया था तब वह केंद्रीय वित्त मंत्री थे। समिति के सदस्य ने कहा, "चिदम्बरम ने इस मामले को बंद करने के लिए प्रधानमंत्री से सिफारिश की, जबकि कुछ मंत्री नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई चाहते थे।"

समझा जा रहा है कि 30 अप्रैल को मौजूदा लोक लेखा समिति का कार्यकाल खत्म होने से पहले गुरुवार को होने वाली अंतिम बैठक में 22 सदस्यीय समिति रिपोर्ट को स्वीकार कर लेगी। सार्वजनिक करने से पहले इसे संसद के अगले सत्र में पेश किया जाएगा।

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