जस्टिस हेगड़े को मनाने दिल्‍ली पहुंचे अन्‍ना हजारे

Anna Hazare
नई दिल्‍ली। लोकपाल विधेयक पर बनी सरकार और नागरिक समाज की साझा समिति के सदस्य संतोष हेगड़े यह मानने को राजी नहीं कि उनके खिलाफ तीर बिना कांग्रेस अध्यक्ष की शह के चले हैं। उन्हें अचरज है कि अन्ना को लिखी चिट्ठी में साझा समिति के सदस्यों के लिए जारी छींटाकशी से सोनिया के खुद को अलग बताने के अगले ही दिन दिग्विजय सिंह ताने का तीर कैसे चला सकते हैं।

वहीं दूसरी तरफ समाजिक कार्यकर्ता अन्‍ना हजारे का कहना है कि लोकपाल बिल की मसौदा समिति के सदस्‍यों को निशाना बनाना ठीक नहीं हैं लोगों को तो ऐसे लोगों का समर्थन करना चाहिए।

अन्‍ना ने कीचड़ उछालने की राजनीति बंद करने पर जोर देते हुए कहा कि जस्टिस संतोष हेगड़े को मनाने की वह पूरी कोशिश करेंगे। दिल्‍ली रवाना होने से पहले अन्‍ना ने कहा कि हमारी यह लड़ाई अगर सहीं नहीं होती तो इतने भारी मात्रा में लोग हमारा समर्थन नहीं करते।

गौरतलब है कि शनिवार की शाम लगभग 5 बजे दिल्‍ली स्थित सिविल सोसाइटी के सदस्‍यों की बैठक होगी। कर्नाटक के लोकायुक्त और सिविल सोसायटी के पांच नुमाइंदों में से एक जस्टिस संतोष हेगड़े ने कहा है कि लोकायुक्त बिल की संयुक्त मसौदा समिति से इस्तीफा देने या न देने के फैसले की घोषणा वे शनिवार को अपने साथियों के साथ चर्चा के बाद करेंगे।

वहीं दूसरी तरफ शिवसेना ने भी शांति भूषण को लेकर शुरू हुए विवाद के मद्देनजर अन्‍ना के आंदोलन को 'झंडू बाम' करार दिया। पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' में लिखा है कि उनका यह आंदोलन जितनी तेजी से परवान चढ़ा था, उतनी ही तेजी से औंधे मुंह लुढ़क गया।

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