गुजरात : मोदी-आडवाणी के घर पर कांग्रेस का डाका, खतरे की घंटी
सोचने वाली बात ये है कि भाजपा के गढ़ में पंजे का यूं फैलना, आने वाले दिनों में भाजपा के लिए खतरे की घंटी हो सकता है, क्योंकि पिछले कुछ सालों गुजरात में कमल ने अपना आधिपत्य जमा लिया था, जब भी विकास की बात होती है, तब हमेशा ही गुजरात का नाम सर्वोपरी होता है, या यूं कह लीजिये इन दिनों गुजरात को मोदी का गुजरात कहा जाने लगा है।
लेकिन निकाय चुनाव के समीकरण कहते हैं कि शायद लोगों का भरोसा कमल पर से उठने लगा है, वरना आडवाणी और मोदी के इस राज्य में इस तरह की हार भाजपा की नहीं होती। और तो और मोदी के ही दम पर भाजपा दिल्ली पहुंचने की तैयारी कर रही है, सबने कयास लगा रखा है कि मोदी का चेहरा आने वाले चुनाव में प्रधानमंत्री पद का प्रमुख दावेदार होगा। वैसे इतिहास गवाह है कि अपनी गलतियों की वजह से भाजपा का वहीं से सफाया हो गया है जहां से वो पैदा हुई है, उत्तर प्रदेश का उदाहरण सबके सामने हैं।
ऐसे में निकाय चुनाव में ये पटखनी भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। खैऱ अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी लेकिन निकाय चुनाव के रिजल्ट कांग्रेस को ऊर्जा में लाने के लिए काफी है। बुरी तरह आरोपों के घेर में घिरी कांग्रेस के लिए ये एक राहत की सांस हो सकती है, क्योंकि केन्द्र में भाजपा के वारों का सामना करते हुए कांग्रेस एक घायल अवस्था में सांस ले रही है। अगर वक्त रहते भाजपा नहीं संभली तो ये उसके लिए बहुत बड़ा खतरा हो सकता है क्योंकि कांग्रेस को फायदा एक बोनस के रूप में मिलेगा लेकिन उसका नुकसान कुछ नहीं होगा क्योंकि गुजरात में उसके पास कुछ भी खोने के लिए नहीं हैं।













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