जैतापुर: विरोध प्रदर्शन में हुई मौत पर शिवसेना का रत्नागिरि बंद

शिवसेना के सैनिक इस प्रदर्शन को पूरी तरह से समर्थन दे रहे हैं। शिवसेना ने कल हुई मौत के विरोध में मंगलवार को रत्नागिरि बंद का ऐलान किया है। बंद को स्थानीय लोगों का पूरी समर्थन मिल रहा है। जापान में 9 की तीव्रता का भूकंप आने के बाद वहां के फुकुशीमा स्थित दायची परमाणु संयंत्र के हश्र से घबराए स्थानीय लोग लगातार परमाणु संयंत्र की स्थापना का विरोध कर रहे हैं। हालांकि परमाणु संयंत्र की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद से ही वहां के लोग इस योजना का विरोध करते आए हैं।
सरकार हमेशा की तरह इस प्रदर्शन पर भी आंखे बंद किए बैठी है। जापान त्रासदी के ठीक बाद से ही जैतापुर परमाणु संयंत्र की चर्चा समय-समय पर होती रही है। सरकार ने इस बाबत परमाणु विशेषज्ञों से बयान दिलाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है कि भारत में स्थापित किए जा रहे परमाणु संयंत्र पूरी तरह से सुरक्षित हैं। जबकि तथ्य कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं -
1. जैतापुर परमाणु संयंत्र की स्थापना भूकंप जोन 3 में की जा रही है जो समुद्र तल से सिर्फ 90 मीटर उंचाई पर ही स्थित है।
2. परमाणु संयंत्र की स्थापना के लिए अब तक 21 परिवारों की जमीन अधिग्रहीत की गई है, लोगों में व्यापक नाराजगी है।
3. परमाणु संयंत्र से हर महीने 300 टन कचरा निकलेगा जिसके निस्तारण की कोई योजना नहीं है। संयंत्र को ठंडा करने के लिए समुद्र का पानी इस्तेमाल किया जाएगा। जापान के फुकुशीमा के परमाणु संयंत्र की तरह।
4. सबसे मुख्य बात ये कि परमाणु संयंत्र को उच्च दाब वाली जिस तकनीक पर स्थापित किया जा रहा है उसे पहले और कहीं इस्तेमाल नहीं किया गया है।
इन तथ्यों को जानने के बाद जैतापुर के स्थानीय जनता का विरोध जायज हो जाता है। दूसरा अहम सवाल ये है कि आखिरकार सरकार किन तर्कों के आधार पर अपने परमाणु संयंत्रों को जापान के संयंत्रों से अधिक सुरक्षित बता रही है?












Click it and Unblock the Notifications