देशद्रोही नहीं बिनायक सेन, सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

Binayak Sen
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। इसके अतिरिक्स सुप्रीम कोर्ट ने उन्हे देशद्रोही भी नहीं माना है और उन्हे बेदाग छोड़ दिया है। बिनायक सेन पर नक्सली नारायण सेन का खत पीयूष गुहा तक पहुंचाने कारोप लगे थे।

बिनायक सेन को नक्सलियों से संबंध रखने के रोप में देशद्रोही करार दिया गया था। इस मामले में जिला अदालत ने उन्हे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था। 61 वर्षीय सेन सुप्रीम कोर्ट में अपना मुकदमा लड़ रहे हैं। सेन पर छत्तीसगढ़ कोर्ट द्वारा 10 फरवरी को लिए गए फैसले की देश-विदेश हर जगह आलोचना हुई है। सेन ने छत्तीसगढ़ उत्त न्यायालय में अपनी याचिका 6 जनवरी को दाखिल की थी। उन्होने जिला अदालत के फैसले को चुनौती दी थी।

जिला अदालत ने उन्हे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। राय पुर की सत्र कोर्ट ने पिछले साल 24 दिसंबर को सेन और उनके साथ तीन अन्य व्यक्तियों को विभिन्न आरोपों के अंतर्गत दोषी करार दिया था। सेन को साल 2007 में छत्तीसगढ़ ने नक्सलियों से संबंध रखने के रोप में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह लगातार कानूनी प्रक्रिया से गिजर रहे हैं और जेल के अंदर हैं।

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