अन्ना की लगाई भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आग राज्यों में फैली

Anna Hazare
नई दिल्‍ली। भाजपा और कांग्रेस ने भेजा अपने-अपने राज्य शासित सरकारों को मौखिक आदेश हजारे के समर्थन में देशभर में करोड़ों हाथ उठे। इससे केंद्र सरकार तो हरकत में आ ही गई, राज्य सरकारों ने भी एक मजबूत लोकायुक्त संस्था के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।

राष्ट्रीय पाटियां भाजपा और कांग्रेस ने अपने अपने शासित सूबों को एक मौखिक आदेश जारी करके कहा है कि वे अपने अपने राज्यों में एक सशक्त लोकायुक्त सस्था के लिए कोशिशें शुरू कर दें जिससे आने वाले समय में भ्रष्टाचार के खिलाफ बजे बिगुल में पार्टियां आमजन के साथ दिखें। न कि अलग-थलग। हालांकि राज्यों के लोकायुक्त का पूरा दारोमदारकुल मिलाकर जनलोकपाल बिल पर ही केंद्रित रहेगा क्योंकि जितना मजबूत यह बिल होगा उतना ही सशक्त लोकयुक्त होंगे।

नखविहीन लोकायुक्त के बजाय भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए ज्यादा ताकतवर लोकायुक्त की पहल दिल्ली सरकार ने की है। वहीं कर्नाटक सरकार भी भले विवादों में रही हो पर उसने भी भ्रष्टाचार की लड़ाई में अपने को आगे रखा है। वह लोकायुक्त को औऱ अधिकार देने संबंधी कानून को पास करने जा रही है। जिससे लोकायुक्त बिना किसी भय और आशंका से अपने काम को मंजिल दे सके।

भाजपा महासचिव रविशंकर प्रसाद तो साफ कहते हैं कि बिहार में हम जैसा कानून बना रहे हैं, वह केंद्र के लिए नजीर हो सकता है। मौजूदा घटनाक्रम बताता है कि जनता भ्रष्टाचार से ऊब चुकी है, लिहाजा इसमें देरी नहीं होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी कहते हैं कि राज्यों में लोकायुक्त संस्था मजबूत करना वक्त की जरूरत है। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए।

पर सबकी निहारों इस बात पर टिकी हुईं है कि लोकपाल बिल को केंद्र सरकार कितनी मजबूती से जनता के सामने पेश करती है। क्योंकि बिल ही यह तय करेगा कि इसके तहत किसे रखा जाए और किसे नहीं। क्या बिल में प्रधानमंत्री को भी लाया जाएगा, क्या विदेश और रक्षा मंत्रालय को भी इसके जांच का भाग बनाया जाएगा, क्या नौकरशाहों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने के अधिकार मिलेंगे।

इन सभी प्रश्नों का उत्तर विधेयक में ही होगा जो 30 जून तक अपना स्वरूप बना लेगा। वैसे केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने रविवार आशा जताई कि डाप्टिंग कमेटी अपने सभी काम 30 जून तक पूरी कर लेगी और इसे संसद के मानसून सत्र तक पेश कर दिया जाएगा।

वहीं कोलकाता में चुनाव प्रचार के लिए गए केंद्रीय वित्त मंत्री ने भी कहा कि यदि सभी दल जिसमें प्रमुख विपक्षी दल भाजपा भी शामिल हैं यदि सहयोग करती है तो इस बिल को मानसून सत्र में ही पारित कर दिया जाएगा। हालांकि बिल के मसौदे पर और इसमें शामिल सदस्यों को लेकर अभी भी दिल्ली में घमासाम मचा हुआ है।

एक तरफ जहां अन्ना हजारे इस पर सफाई दे रहे हैं वहीं योग गुरु बाबा राम देव अपने बयान को जनता का बयान बता रहे हैं। पर जो भी हो आम जनता का मानना है कि अन्ना हजारे ने जो भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल फूंका है उसका कुछ न कुछ असर तो अवश्य ही होगा। भले ही इस भ्रष्टाचार के दानव को समाप्त नहीं किया जा सके, पर उस पर नकेल लगने की पूरी संभावना है।

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