बच्चों के लिए अन्ना हजारे बने 'दूसरे गांधी'

कुल 97 घंटे तक चले अनशन के दौरान अन्ना हजारे को देखने वाले बच्चों का कहना है कि उन्हें देखना उनके लिए कभी न भुलाने वाली बात है। अहिंसक आंदोलन के जरिए भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई छेड़ने वाले 73 वर्षीय गांधीवादी अन्ना हजारे ने जब एक बच्ची के हाथों नीबू पानी पीकर अपना अनशन तोड़ा था तब वहां अपने शिक्षकों और अभिभावकों के साथ पहुंचे बच्चों ने नाच गाकर जमकर जश्न मनाया था।
अन्ना हजारे ने सरकार द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी कानून बनाने को लेकर उनकी सभी मांगें माने जाने के बाद अनशन खत्म किया था। इस दौरान यहां मौजूद सैकड़ों बच्चे इस दृश्य को देखकर बेहद खुश नजर आए क्योंकि इस माहौल के बारे में उन्होंने केवल किताबों में पढ़ा था। जंतर मंतर पर मौजूद सेंट मिशेल स्कूल के 11वीं कक्षा की छात्रा सुभा सलुजा ने कहा, "मैंने पढ़ा है कि गांधी महान थे लेकिन मैंने उन्हें देखा नहीं। मैं नहीं जानती थी कि अन्ना हजारे कौन हैं लेकिन अब मैं उन्हें मेरे गांधी कहती हूं।"
अन्ना हजारे के समर्थन में स्कूलों के सैकड़ों बच्चे झंडे और बैनर लेकर धरना स्थल पहुंचे थे। गुडगांव के ब्लू बेल्स पब्लिक स्कूल के रेणु जैन ने कहा कि अन्ना हजारे के विरोध का तरीका गांधीवादी है और यह विरोध हमें बेहतर नागरिक बनाने के लिए है। रेणु ने कहा, "यदि अन्ना हजारे हमारे लिए अनशन कर सकते हैं तो हम अपने देश के लिए अच्छे नागरिक क्यों नहीं बन सकते।" सरदार पटेल विद्यालय की कक्षा छठवीं की छात्रा आकांक्षा अग्रवाल ने कहा, "चुपचाप बैठने से कुछ नहीं होगा, अपने आसपास की चीजों को बदलने के लिए आगे आना होता है।"












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