हजारे ने ठुकराई सिब्बल की पहल, प्रतिनिधिमंडल रहा विफल

पर आशानुसार सरकार भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने से ज्यादा हजारे के आमरण अनशन को जल्द से जल्द खत्म करने की इच्छुक है। इसलिए सरकार जन लोकपाल विधेयक तो लाना चाहती है लेकिन उसका स्वरूप अपने मन मुताबिक ही रखना चाहती है। सरकार ने प्रस्ताव रखा कि हजारे द्वारा सुझाया गया प्रतिनिधि मंडल विधेयक के स्वरूप को तय करने में अनौपचारिक भूमिका ही निभाएगा और किसी भी तरह से सरकार उस समिति के सदस्यों के प्रति जवाबदेह नहीं होगी।
मतलब सरकार हजारे का अनशन तुड़वाने के लिए विधेयक तो लाने का स्वांग करना चाहती है। लेकिन सारे नाटक की असली सूत्रधार बन कर सब कुछ अपने हिसाब से तय करना चाहती है। अन्ना हजारे का प्रतिनिधिमंडल सिब्बल के साथ दो स्तरीय वार्ता के बाद भी निराश होकर लौटा है। इससे साफ जाहिर है कि आने वाले दिनों में हजारे की ये लड़ाई उनके जीवन-मरण का प्रश्न बनने वाली है।












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