सरकार के गले की फांस बना जाट आरक्षण आंदोलन

रामायण गांव के पास जाट आंदोलनकारी पिछले 18 दिनों से रेलवे ट्रैक जाम किए बैठे हैं। इसके साथ-साथ गाजूवाला गांव के पास हिसार-लुधियाना, झूंपा गांव के पास हिसार-जयपुर, मेहूवाला गांव के पास हिसार-सिरसा तथा फतेहगढ़ गांव के पास भिवानी-रेवाड़ी रेलमार्ग भी आंदोलनकारियों ने जाम कर रखे हैं। इसके अलावा प्रदेश के कुछ अन्य हिस्सों में भी आरक्षण की आग के चलते रेलमार्ग बंद है। अधिकतर रेलगाडिय़ां बंद होने के कारण प्रतिनिदिन हजारों यात्री परेशान हो रहे हैं वहीं रेलवे को लाखों का चूना झेलना पड़ रहा है। इसके अलावा रेलवे स्टेशनों पर काम करने वाले भी बेरोजगार होकर रह गए हैं।
केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा अपनाई जा रही टाल-मटोल की नीति के कारण जाट आंदोलकारियों में गुस्सा है वहीं मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा द्वारा आरक्षण की वकालत कर देने से इस आंदोलन को और हवा मिल गई। आंदोलन की शुरूआत के साथ ही जिस तरह आंदोलनकारियों ने रेल पटरियों को जाम करके केन्द्र पर दबाव बनाने का प्रयास किया और प्रदेश के सड़क मार्ग पर किसी तरह का व्यवधान नहीं डाला, उससे लग रहा था कि आंदोलन को प्रदेश सरकार की मूक सहमति है। आम जनता भी कहने लगी थी कि प्रदेश सरकार की सहमति से ही केन्द्र पर दबाव बनाने के लिए यह आंदोलन चलाया जा रहा है। आंदोलनकारियों द्वारा सीधे तौर पर सोनिया गांधी व मनमोहन सिंह के पुतले फूंकने तथा मुख्यमंत्री के पुतले फूंकने से परहेज करने से भी इस बात को काफी हवा मिली।
खास बात यह भी रही कि जहां पर सोनिया गांधी व मनमोहन सिंह के पुतले फूंके जा रहे थे, वहां पर कांग्रेस से जुड़े लोग भी मौजूद रहते थे लेकिन यदि कोई मुख्यमंत्री का पुतला फूंक देता था तो आरक्षण समिति स्पष्ट कर देती थी कि इससे समिति का कोई लेना-देना नहीं है। केन्द्र ने भी आंदोलन को समाप्त करवाने के दो बार प्रयास किए लेकिन जब बात सिरे नहीं चढ़ी तो यह कहकर गेंद प्रदेश सरकार के पाले में डाल दी कि पहले हरियाणा सरकार जाटों को आरक्षण देने का बिल विधानसभा में पारित करें, केन्द्र भी उसी आधार पर आरक्षण दे देगा।
केन्द्र की इस गेंद को खेलते हुए जाट नेताओं ने दो दिन पूर्व हिसार आए मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा से बात की तो श्री हुड्डा ने जाटों को टका सा जवाब दे दिया, कि वे हरियाणा में जाटों को आरक्षण नहीं देंगे। इस जवाब के बाद प्रदेश के जाटों में मुख्यमंत्री के प्रति गुस्सा देखा जा रहा है। इसके बाद आंदोलनकारियों ने विभिन्न स्थानों पर सोनिया गांधी व मनमोहन सिंह के साथ-साथ मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के पुतले फूंकने भी शुरू कर दिए।
खैर हुड्डा का जो हाल है वो है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि आगे चलकर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती का भी कुछ ऐसा ही हाल होने वाला है। मायावती इस समय जाटों का समर्थन कर रही हैं, लेकिन आगे चलकर जाट समुदाय ही अपनी अन्य मांगों के लिए मायावती के खिलाफ खड़ा हो सकता है। हालांकि आरक्षण की बात करें तो यूपी में पहले से ही जाटों को आरक्षण मिला हुआ है।












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