सीबीआई ने एंडरसन के प्रत्यार्पण की मांग की, सुनवाई आज

सीबीआई ने मुख्य महानगर दंडाधिकारी विनोद यादव की अदालत में यूनियन कार्बाइड कम्पनी के पूर्व अध्यक्ष एंडरसन के खिलाफ याचिका दायर की। मंगलवार को न्यायाधीश विनोद यादव ने याचिका को स्वीकार करते हुए आवेदन की प्रति रख ली और मामले की सुनवाई के लिए 23 मार्च की तारीख मुकर्रर की। सीबीआई ने अपने 33 पृष्ठों की अपनी याचिका में 90 वर्षीय एंडरसन के प्रत्यर्पण के लिए प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
सीबीआई ने कहा, "अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया है कि एंडरसन के खिलाफ आपराधिक मामला बनता है।" सीबीआई के इस कदम पर हालांकि भोपाल के कार्यकर्ताओं में कोई विशेष उत्साह नहीं है।
भोपाल गैस त्रासदी में जीवित बचे अब्दुल जब्बार ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "ये सीबीआई का नया शिगूफा है। शुक्रवार को इस मामले में मंत्रियों के समूह की बैठक होने वाली है। पीड़ितों का मुआवजा बढ़ाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में भी 13 अप्रैल से सुनवाई होने वाली है। इसलिए सीबीआई ने यह दिखाने के लिए अदालत में याचिका दायर की है कि वह भी कुछ कर रही है। सीबीआई ने ऐसा करीब सैकड़ों बार किया, लेकिन वह एंडरसन का प्रत्यर्पण सुनिश्चत नहीं कर पाई। हमें अब भी उसके इरादे पर संदेह है।"
एक अन्य कार्यकर्ता सतीनाथ सारंगी ने कहा, "भोपाल की एक अदालत ने 1992 में एंडरसन के खिलाफ वारंट जारी किया था और सीबीआई ने 2003 में उसके प्रत्यर्पण की मांग की। छह माह के भीतर अमेरिका ने आवेदन में कई खामियों का उल्लेख करते हुए इसे खारिज कर दिया था। गैस त्रासदी पर अदालत के फैसले के करीब एक साल बाद इसने फिर याचिका दायर की है। देखते हैं सीबीआई अमेरिकी सरकार पर एंडरसन के प्रत्यर्पण के लिए कैसे दबाव बनाती है।"
पिछले साल जून में भोपाल की अदालत ने करीब 26 साल बाद गैस त्रासदी के लिए यूनियन कार्बाइड इंडिया के अध्यक्ष केशुब महिंद्रा और छह अन्य को दोषी ठहराते हुए दो-दो साल कैद की सजा सुनाई थी। दोषियों को इतनी कम सजा पर कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रिया हुई। वर्ष 1984 में दो-तीन दिसम्बर की रात यूनियन कार्बाइड कम्पनी से जहरीली गैस के रिसाव के कारण हजारों लोग मारे गए थे और हजारों शारीरिक रूप से विकलांग हो गए थे।












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