चढऩे लगा फागुनी रंग, ब्रज में छायी होली की बयार

लखनऊ/मथुरा। प्रदेश में फागुन का रंग धीरे-धीरे चढऩे लगा है। मथुरा नगरी में होली की यह बयार कुछ ज्यादा ही तेज बह रही है। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा समेत पूरे बृज के मंदिरों में गुलाल की होली और ढाप पर रसिया गायन शुरु होने के साथ ही होली का रंग लोगों में छाने लगा है। श्रीकृष्ण की शाश्वत शक्ति स्वरूपा राधारानी की नगरी बरसाने में प्रसिद्घ लठ्ठमार होली की तैयारियों में भी तेजी हो गयी है। भगवान की बाल लीलास्थली वृंदावन का तो समूचा वातावरण ही होलीमय हो चला है। राजधानी लखनऊ में होली का असर लोगों पर तो नहीं परन्तु बाजारों में अवश्य दिख रहा है। बाजार रंग गुलाल केसाथ बच्चों की पिचकारियों से पट गए हैं।

होली आने के साथ ही उत्त्तर प्रदेश में रंग गुलाल के साथ होली के गीत गूंजने लगते हैं। प्रदेश के कुछ जिलों में होली का अवसर कुछ अधिक ही दिखायी देता है जिसमें बरसाने की होली की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली है। बरसाने में अत्यंत उत्कंठित होकर हर्षोल्लास के साथ होली खेलने वाली गोपयों की तो दिनचर्या ही होली पर केन्द्रित हो गयी है। यहां की होली कुछ खास ही होती है।

ब्रजवासी वर्ष भर किसी अन्य पर्व का इतनी बेसब्री से इंतजार नहीं करते जितना होली का करते हैं। ब्रज में बसंत पंचमी से पांच दिन तक श्यामा-श्याम की होली होती है। ब्रजवासी इसे युगल सरकार यानी राधा-कृष्ण के प्रसाद के रुप में ग्रहण करते हैं। बरसाने की लठ्ठमार होली प्रेम का संदेश देकर जाती है।

यह माना जाता है कि कृष्ण और राधा की कृपा से होली के अवसर पर यहां लाठी फूल छड़ी बन जाती है और होलिका दहन के अंगारे गुलाब की पंखुडी जैसे कोमल एवं बर्फ से भी ज्यादा शीतल बन जाते हैं। होलिका दहन की लपटें श्रीकृष्ण भक्त प्रहलाद के भक्तों को फुहारें जैसी शीतलता प्रदान करती हैं। नन्दगांव में ऐतिहासिक लठ्ठमार होली मनायी जा रही है। एकादशी यानि बुधवार को श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में होली मनायी जाएगी। यहां की होली की विशेषता यह है कि ब्रज में खेली जाने वाली सभी पारंपरिक होलियां देखने को मिलती हैं।

आगामी 19 मार्च को फालैन और जटवारी गांव की चामत्कारिक होली खेली जाएगी। इस दिन पंडे आग के अंगारों और आग की लपटों में से होकर गुजरते हैं किंतु उनके शरीर पर आग का कोई असर नहीं होता। वे लोग इसे भगवान श्रीकृष्ण का आर्शीवाद मानते हैं। फालैन गांव में जहां इस बार बलराम पंडा अंगारों से गुजरेगे वहीं संतोष पंडा जटवारी गांव में होली की लपटों से होकर गुजरेगे।

होली के बाद ब्रज में हुरंगों की बारी आती है। हुरंगों में बलदेव का हुरंगा सबसे अधिक मनोहारी होता है। ब्रज में होली इतनी मनोहारी होती है कि यहां की होली देखने के लिए लोग दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं। राजधानी में भी होली का असर दिखायी देने लगा है लोग होली की खरीददारी में जुट गए हैं। रंग गुलाल व पिचकारियों के साथ नये कपड़ों की खरीददारी जोरों पर हैं।

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