‘इस्लामी ड्रेस कोड न मानने पर सज़ा’

‘इस्लामी ड्रेस कोड न मानने पर सज़ा’
ड्रेस कोड न मानने वाली महिलाओं पर हमले किए जा रहे हैं.एक रिपोर्ट के मुताबिक चेचेन में महिलाओं पर जबरन इस्लामी ड्रेस कोड लागू किया गया है और इसे न मानने वाली महिलाओं पर हमले किए जा रहे हैं.मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की एक रिपोर्ट में उन महिलाओं की आपबीती है जो इस 'नैतिक आंदोलन" का शिकार हुई हैं.

संगठन का कहना है कि आमतौर पर नौजवानों की ओर से किए गए इन हमलों में कई बार चेचेन के सुरक्षाबल खुद शामिल होते हैं.रिपोर्ट के मुताबिक इस 'नैतिक आंदोलन" को चेचन्या के राष्ट्रपति रमज़ान कादिरोव को समर्थन प्राप्त है. भले ही रुस की सरकार इस क्षेत्र में स्थिरता को लेकर कादिरोव पर विश्वास करती हो.

साल 2007 में राष्ट्रपति कादिरोव ने एक आदेश जारी किया था जिसके तहत बिना सिर ढके कोई भी महिला सरकारी इमारत में दाखिल नहीं हो सकती थी. भले ही यह आदेश रुसी कानून का उल्लंघन करता हो लेकिन इस पर आज भी सख्ती से अमल होता है.संगठन का कहना है कि इसके बाद से ही चेचेन में महिलाओं के अधिकारों को सीमित करने का आंदोलन ज़ोर पकड़ रहा है.जून 2010 में दर्जनों महिलाओं पर सिर पर न ढकने, नक़ाब न पहनने और वाहों या स्कर्ट की लंबाई कम होने को लेकर हमले किए गए.

ऐसी ही एक महिला ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उन पर हमले के दौरान बंदूक तान दी गई और उन्हें बुरी तरह खंरोंचे और चोटें आईं. इसके बाद उन्होंने कभी भी बिना नकाब़ के घर से निकलने की हिम्मत नहीं की.मानवाधिकार संगठन का कहना है कि इस तरह के क़ानून महिलाओं के अधिकारों का हनन करते हैं और इन हमलों में सुरक्षाबलों का शामिल होना बेहद चिंताजनक है

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+