भोपाल के नए नाम 'भोजपाल' का ऐलान, विरोध शुरू
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्य में भोपाल का नाम बदलने का फैसला राजा भोज की स्मृति में लिया। लाल परेड मैदान पर राजा भोज राज्यरोहण सहस्त्राब्दी समारोह में मुख्यमंत्री चौहान ने भोपाल के नये नाम की घोषणा की। मुख्यमंत्री का तर्क है कि जिस प्रकार बंबई बदलकर मुंबई हो सकता है, कलकत्ता कोलकाता हो सकता है उसी प्रकार भोपाल बदलकर भोजपाल भी हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने ये घोषणा भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के समक्ष की। इसे यह साफ हो गया कि भोपाल के नये नाम को भाजपा समेत सहयोगी दलों का पुरजोर समर्थन हांसिल है।
मुख्यमंत्री के इस फरमान के खिलाफ विपक्षी दलों व आम जनता की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। वरिष्ठ कांग्रेस का कहना है कि भोपाल का नाम बदल कर भोजपाल करने का सवाल ही नहीं उठता। प्रस्ताव को वो कभी पूरा नहीं होने देंगे। ऐसा करने की इजाजत प्रदेश सरकार को कतई नहीं दी जाएगी।
वहीं आम जनता की बात करें तो भोपाल निवासी व सरकारी कार्यालय में शिक्षक शिव नारायण दीक्षित का कहना है कि ऐसा करके सरकार को कुछ हांसिल नहीं होने वाला। वहीं एडवोकेट करुणेश्वर शर्मा का कहना है कि ऐसा करके भाजपा सिद्ध क्या करना चाहती है। सिर्फ एक राजा के नाम पर पूरे शहर का नाम बदलना उचित नहीं है।
इस बारे में हमने लखनऊ के समाजशास्त्री ध्रुव सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि अगर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कलकत्ता और मुंबई का तर्क दे रहे हैं, तो वे गलत हैं, क्योंकि कलकत्ता और मुंबई के नाम सिर्फ इसलिए बदले गये थे, क्योंकि इन दोनों महानगरों के पुराने नाम अंग्रेजों ने रखे थे, जो आज की जनता नहीं चाहती है। जबकि भोपाल के साथ ऐसा कुछ नहीं है। श्री सिंह ने कहा कि यह महज़ एक राजनीति है, जिसमें एक पार्टी दूसरे दलों को अपनी मनचाही उपलब्धि दिखाने की फिराक में रहती है।
क्या आप चाहेंगे भोपाल का नाम बदला जाये? अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें।













Click it and Unblock the Notifications