अमरीकी पसंद करते हैं भारत को

ज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
हाल में गैलप के एक मतदान में अमरीकियों ने अपने पसंदीदा और ग़ैर पसंदीदा देशों के बारे में राय दी. सब से पसंदीदा देशों में भारत पांचवें नंबर पर आया.
बहत्तर प्रतिशत अमरीकियों ने भारत को अपना सबसे प्रिय देश माना. कनाडा, ब्रिटेन जर्मनी और जापान के बाद भारत का नंबर था. दूसरी तरफ पाकिस्तान को 76 प्रतिशत लोगों ने नापसंद किया और इंटरव्यू में शामिल केवल 18 प्रतिशत लोगों ने इसे पसंद किया.
भारत पसंदीदा देशों की सूची में चीन से भी कहीं आगे था, जिसे केवल 47 फ़ीसदी अमरीकियों ने अपना पसंदीदा देश माना.
मैं ब्रिटेन में आठ साल रहा हूँ. चिकेन टिक्का मसाला और भारतीय खान पान की लोकप्रियता और भारतीय कंपनियों के ब्रिटेन में ज़बरदस्त निवेश के बावजूद हमें कभी ऐसा नहीं महसूस हुआ कि वहां के लोग भारत को बहुत अच्छी नज़र से देखते हैं.
अधिकतर लोग यह सोचते थे कि भारत में केवल ग़रीबी और गंदगी है. उनकी सोच बहुत ग़लत भी नहीं थी लेकिन भारत की बढ़ती हुई शक्ति को वह पहचानने से भी इनकार करते थे.
अमरीका में भारत की काफी इज़्ज़त है. और हो भी क्यूँ नहीं. यहाँ के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय हों या सॉफ्टवेर कंपनियां, यहाँ की राजनीति हो या सामाजिक क्षेत्र, भारतीय काफ़ी कामयाब हैं.
अमरीका में भारत की लोकप्रियता की बात चल रही है तो यह बताता चलूँ कि जो अमरीकी भारत का दौरा नहीं कर सकते उनके लिए केनेडी सेंटर और यहाँ भारतीय दूतावास ने मिलकर भारत की एक झलक दिखाने का आयोजन किया है.
पहली से 20 मार्च तक वॉशिंगटन के केनेडी सेंटर में भारत के प्रसिद्ध गायक, नाटककार, फ़िल्मी हस्तियाँ और ख़ानसामे अपने देश की संस्कृति और कला को अमरीकियों तक पहुंचाएंगे.
भारतीय राजदूत मीरा शंकर के अनुसार यह पुरे भारत की नुमाइश नहीं है बल्कि भारतीय कला और संस्कृति का एक प्रदर्शन है.
तीन हफ्ते तक चलने वाला यह प्रदर्शन एक मार्च से शुरू हो रहा है लेकिन कई दिन पहले ही बहुत सारे शो के टिकटें बिक चुके हैं. लेकिन भारत के चाहने वालों को मायूसी नहीं होगी क्यूंकि कई शो मुफ्त दिखाए जा रहे हैं.
भारत और अमरीका के बीच सम्बंधों में तेज़ी से घनिष्ठता आ रही है. कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है.
एक ज़माना था जब (बल्कि कुछ साल पहले तक) भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्री इंग्लैंड और अमरीका का चक्कर लगाते थे और निवेशकों को अपने राज्यों में निवेश करने के लिए लुभाते थे. अब काया पलटती दिखाई देती है.
अमरीका के कई राज्य कर्जों में डूबे हुए हैं. और कई शहरों का बजट घाटे में चल रहा है. उन में से कई की निगाहें अब भारत के निवेशकों की ओर जा रही है.
भारतीय कंपनियों ने 2009 तक अमरीका में 4.5 अरब डालर निवेश किया था. लेकिन अगर अप्रत्यक्ष निवेश की बात की जाए तो यह 20 अरब डालर से अधिक का है.
कई राज्य और शहर भारतीय कंपनियों के अपने यहाँ निवेश के लिए योजनाए बना रहे हैं.
अमरीकी इस बात की प्रशंसा करते हैं की एसार ग्रुप ने 1.6 अरब डालर निवेश करके मिनेसोटा इस्पात उद्योग कंपनी को डूबने से बचाया था जिस के कारण 12 अमरीकी राज्यों में सात हज़ार लोगों की नौकरियां ख़त्म होने से बच गईं.
इसी तरह अमरीकियों को मालूम है कि टाटा ग्रुप ने तीन अरब डालर की रकम निवेश करके देश भर में 19,000 लोगों को नौकरियां दी हुई हैं.












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