देवी लक्ष्मी और इंद्रदेव को समर्पित प्रणब दा का आम बजट

प्रणब दा ने देवी लक्ष्मी और इंद्रदेव को अपने आम बजट पर कृपा बनाए रखने को संसद में स्मरण किया। इस बार के बजट में प्रणब दा ने आम आदमी के टैक्स के भार को हल्क करने की प्रमुख कोशिश की है। टैक्स लिमिट बढ़ाने से लेकर वृद्ध जनों को आयकर में रियायत देने का फैसला कर सरकार ने जहां एक दांव खेला है वहीं दूसरी ओर महिलाओं को आयकर में विशेष व्यवस्था ना देकर दूसरे हाथ से ये रियायतें बराबर कर दी हैं।
पिछले एक साल से सरकार के लिए गले की हड्डी बनी खाद्य महंगाई को काबू करने के लिए प्रणब दा ने बड़े-बड़े मंसूबे तैयार किए हैं लेकिन योजनाओं को अमली जामा पहनाने की व्यवस्था बजट में कहीं दिखाई नहीं दी। हालांकि ये बात अच्ची है कि सरकार ने कृषि क्षेत्र पर इस बार बेहतर ढंग से फोकस किया है। दाल से लेकर अनाज और सब्जी तक की पैदावार और वितरण के लिए सरकार ने बजट में अलग-अलग योजनाएं बनाई हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र, शिक्षा क्षेत्र के लिए भी इस बार का बजट खुशगवार है, ये बात अलग है कि दोनों ही क्षेत्रों की हालत इतनी खराब है कि सरकार द्वारा किए गए उपाय ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित होने वाले हैं। इसके उलट उद्योग जगत के लिए बजट ऊपरी तौर पर नुकसानदायक दिखाई दे रहा है। शराब परोसने वाले बार में भी अलग सर्विस टैक्स लगाया जाएगा और हवाई यात्रा पर भी सर्विस चार्ज लग गया है मतलब एक बार फिर महंगी शराब और हवाई यात्राएं सिर्फ उच्च वर्गीय लोगों के बूते की ही बात हो जाएंगी।
प्रणब दा ने बजट पेश करने से पहले हिंदू धर्म में धन की देवी मानी जानी वाली लक्ष्मी और पानी के देवता माने जाने वाले इंद्रदेव का नमन किया और उनसे देश पर अपनी अनुकंपा बनाए रखने की प्रार्थना की। महंगाई से त्रस्त वित्त मंत्री के पास अब भगवान की शरण में जाने के अलावा उपाय भी क्या बचा है?












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