आखिर ममता बनर्जी कैसे पूरे करेंगी अपने वादे?

नई दिल्ली। रेल मंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को पेश किए गए अपने रेल बजट में नई योजनाओं और घोषणाओं के ढेर लगा दिए हैं। लेकिन उल्लेखनीय बात ये है कि पिछले पांच सालों में रेलवे को जबर्दस्त घाटा हुआ है। इसका जाहिरा कारण ममता बनर्जी ने छठे वेतन आयोग को बताया। ममता ने कहाकि छठे वेतन आयोग की वजह से रेलवे के ऊपर 97 फीसदी अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।

एक ओर केंद्र सरकार ने रेलवे बजट की तारीफ कर ममता की पीठ ठोंकी। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने ममता के बजट को पश्चिम बंगाल का रेल बजट करार दिया है। भाजपा ने कहाकि ममता ने बजट के जरिए राइटर्स बिल्डिंग के लिए छुपी रेलवे लाइन बिछाने की कोशिश की है। भाजपा के एक नेता ने तो यहां तक कहा, "रेल बजट यानी बंगाल ही बंगाल, बाकी देश कंगाल।"

लोकसभा में भाजपा के उपनेता गोपीनाथ मुंडे ने रेल बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "पश्चिम बंगाल में चुनाव हैं, इसलिए रेल बजट में सिर्फ वादे ही वादे हैं। घोषणाएं ज्यादा और अमल कम है। इस बजट में सारा देश कंगाल है, सिर्फ बंगाल ही बंगाल है।" उन्होंने कहा, "इस बजट में पिछली घोषणाओं का जिक्र नहीं किया गया है। रेल मंत्री को पिछली घोषणाओं को लेखा-जोखा देना चाहिए। पिछले पांच साल में रेलवे के मुनाफे का जो सपना दिखाया गया था वह गलत साबित हुआ है। बजट में बाजार से 10,000 करोड़ रुपये लेने की बात कही गई है, इसका मतलब ये हैं कि कर्ज लेकर सरकार घी पियेगी।"

भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, "इस बजट से राहत तो दूर मायूसी ही मायूसी हाथ आई है। बंगाल में राईटर्स बिल्डिंग के लिए छुपी हुई रेल लाइन बिछाने की कोशिश की गई है।" उन्होंने कहा, "बिहार आज भी उपेक्षित है। बजट से बिहार को निराशा हुई है। सांसदों ने जो गुस्सा दिखाया वह वाजिब था।"

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