500 करोड़ का घोटालेबाज़ इंजीनियर सीबीआई की गिरफ्त में

cbi
लखनऊ। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर 2जी, आदर्श सोसाइटी, राष्‍ट्रमंडल, ताज कॉरीडोर और भूमि घोटालों के बाद अब एक नया घोटालों के सूत्र खुलने के बाद अब उत्‍तर प्रदेश के औद्योगिक घोटाले की कड़ी भी लगभग टूट गई है। करीब 500 करोड़ रुपए का यह घोटाला करने वाले उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) के चीफ इंजीनियर अरूण कुमार मिश्रा केंद्रीय जांच ब्‍यूरो की गिरफ्त में आ चुके हैं। खबर है कि सीबीआई ने अरुण कुमार के आवास और कार्यालय में गुरूवार की शाम छापा मारा।

अरूण कुमार के उपर 500 करोड़ से ऊपर के वित्तीय घोटाले का आरोप है। जिसके तहत सीबीआई की टीम ने एक साथ देश में स्थित उनके करीब 17 ठिकानों में छापेमारी की है। सूत्रों के हवाले से ऐसी खबर मिली है कि अरूण कुमार मिश्रा को लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया गया है। नवाबगंज में स्थित यूपीएसआईडीसी की आफीसर्स कालोनी के फ्लैट नंबर-12 में रहने वाले चीफ इंजीनियर अरुण कुमार मिश्रा के यहां सीबीआई टीम ने गुपचुप तरीके से छापा मारा। जहां सीबीआई अधिकारियों की छानबीन अभी जारी है।

इस संबंध में पूछे जाने पर सीबीआई अधिकरियों ने कोई भी जानकारी देने से साफ मना कर दिया है। चीफ इंजीनियर के यहां सीबाआई छापा पड़ने के सूत्रधार माने जा रहे यूपीएसआईजीसी इम्प्लाइज यूनियन के महामंत्री वीके मिश्रा ने बताया कि यूपीएसआईडीसी के चीफ इंजीनियर अरुण कुमार मिश्रा प्रदेश की पिछली सपा सरकार की सरपस्ती के बहुत बड़े घोटाले बाज है। इन्होंने निगम की व्यवसायिक भूमि को बेचने में की गयी हेराफेरी और फर्जी भुगतानों के माध्यम से कई सौ करोड़ रुपए का वित्तीय घोटाला कर अकूत दौलत कमाई है।

आर्थिक मामलों के कई आरोप लगने के बाद सपा सरकार ने चीफ इंजीनियर को नीलंबित कर दिया लेकिन कुछ ही दिनों में उन्हें बहाल कर दिया गया। इसके बाद मुलायम राज के बाद मायावती प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी तो उन्होंने चीफ इंजीनियर को बर्खास्त कर उनके ऊपर आर्थिक घोटालों की जांच के आदेश दे दिए। जिसके तहत सिंतबर 2007 में स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया गया। टीम ने जांच के दौरान अरुण मिश्रा के खिलाफ दो एफआईआर भी दर्ज करायी थी। जांच के दौरान ही एसआईटी को उनके फर्जी बैंक एकाउण्टों की भी जानकारी मिली। जिनके तार उत्तराखण्ड की पंजाब नेशनल बैंक की एक शाखा के प्रबंधक से जुड़े होने का पता चला था।

टीम ने अरुण मिश्रा समेत 16 लोगों को आरोपी बनाकर हाईकोर्ट में उनके खिलाफ रिटें भी दायर की थी। इन आरोपियों में दो आईएस अधिकारियों के भी नाम शामिल हुए थे। लेकिन फिर पता नहीं क्या हुआ कि एसआईटी की जांच अचानक सुस्त हो गयी औऱ टीम इनका सहयोग करने लगी। जिसके कारण अरुण मिश्रा द्वारा बसपा के बड़े नेताओं को करोड़ों दे कर खुद को बचाने का प्रयास बना जा रहा है।

आरोपियों ने कई रिटों को वापस करा लिया। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार यूपीएसआईडीसी के लेखाकार एसएन राम चीफ इंजीनियर के करीब 16 बेनामी बैंक खातों को नगर में संचालित करते है। यह खातें नगर की पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक, कलकत्ता बैंक और आईडीबीआई आदि बैंकों में हैं। जिनसे हमेशा 50 लाख से ऊपर की रकम का आदान होता हैं। वैसे तो देश भर के करीब 50 बैंकों में अरुण मिश्रा के बेनामी खातें हैं जिनमें गैर कानूनी तरीके से कमाएं गए करोड़ों रुपए जमा हैं। सीबीआइ का कहना है कि वह जल्‍द ही भ्रष्टाचार के इस मामले का खुलासा करेगी।

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