दूरसंचार क्षेत्र के विकास को नजरअंदाज न करें : मनमोहन

Manmohan Singh
नई दिल्ली। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विपक्ष के हमले से घिरे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को कहा कि कुछ समस्याएं हैं, लेकिन संचार क्षेत्र में विकास को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि ऐसा कोई घोटाला है तो इससे निपटा जाएगा।

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा, "लोग घोटाले के बारे में बात कर रहे हैं। अगर ऐसा है तो इससे सख्ती से निपटा जाएगा। लेकिन हम संचार के क्षेत्र में हुए विकास को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते।"

उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले कुछ सालों में देशभर में संचार के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। अगर आंकड़ों पर यकीन किया जाए तो मार्च, 2004 में ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीफोन घनत्व 1.55 प्रतिशत था, जबकि शहरी क्षेत्र में यह 20.5 फीसदी था। मार्च, 2007 में देशभर में कुल टेलीफोन घनत्व 7.7 प्रतिशत था। लेकिन दिसम्बर, 2010 में यह काफी बढ़ गया।

दिसम्बर, 2010 में ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीफोन का घनत्व 31.18 प्रतिशत रिकॉर्ड किया गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह प्रशित 47 रहा। देश का कुल टेलीफोन घनत्व बढ़कर 66 प्रतिशत हो गया। यह राष्ट्रीय संचार नीति के तहत ही संभव हो पाया, जिसमें नीलामी या बोली लगाने का प्रावधान नहीं है।

उन्होंने कहा, "टेलीकॉम नीति पहले आओ, पहले पाओ पर आधारित है और इसमें कुछ गलत नहीं है। 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस के आवंटन के लिए सरकार ने इसी नीति का अनुसरण किया और इससे सरकार को बड़ा लाभांश मिला। सरकार आगे भी लाइसेंस आवंटन के लिए इसी नीति का अनुसरण करेगी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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