वस्तानवी को राहत लेकिन असमंजस बरकरार

मौलाना वस्तानवी फ़िलहाल कुलपति बने रहेंगे.
सहारनपुर के क़रीब देवबंद में स्थित भारत में इस्लामी शिक्षा के सबसे बड़े संस्थान दारूल उलूम के विवादास्पद कुलपति मौलाना गु़लाम मोहम्मद वस्तानवी को बुधवार को संस्थान की मजलिस-ए-शुरा से थोड़ी राहत मिली.
लेकिन मजलिस-ए-शुरा ने एक कार्यवाहक कुलपति नियुक्त करने के अलावा वस्तानवी पर लगे आरोपों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति भी बनाई है, जो सभी मुद्दों की जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी.
ग़ौरतलब है कि वस्तानवी ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कुछ टिप्पणियां की थीं जिनकी दारुल उलूम में और उसके बाहर कड़ी आलोचना हुई थी. उसके बाद से ही उनके इस्तीफ़े की मांग की जाने लगी थी.
तीन सदस्यीय समिति को रिपोर्ट जमा करने के लिए कोई समयसीमा नहीं दी गई है.
दारूल उलूम इस्लामी शिक्षा का एक बड़ा केंद्र है
वस्तानवी की मौजूदगी में शुरा का बयान पढ़ते हुए मौलाना अब्दुल आलिम फ़ारुक़ी ने कहा कि मजलिस-ए-शुरा ने वस्तानवी के इस्तीफ़े की पेशकश ख़ारिज कर दिया है.
उन्होंने कहा, "समिति की रिपोर्ट आने तक वस्तानवी के इस्तीफ़े की पेशकश को स्थगित रखा जाएगा. मुफ़्ती अबुल क़ासिम नोमानी बनारसी को कार्यवाहक वाइस चांसलर नियुक्त किया जा रहा है. अगर शुरा वस्तानवी का इस्तीफ़ा मंज़ूर कर लेती है तो नोमानी दारुल उलूम के प्रमुख हो जाएंगे."
मौलाना नोमानी मजलिस-ए-शुरा के सदस्य हैं और वे वाराणसी में एक मदरसा चलाते हैं.
वस्तानवी ने भी पत्रकारों को बताया, "मैं अब भी दारुल उलूम का उप कुलपति हूं."
ग़ुलाम मोहम्मद वस्तानवी गुजरात से आते हैं और उन्होंने एमबीए की भी पढ़ाई की है. उन्हें इसी वर्ष 10 जनवरी की मजलिस-ए-शुरा ने ही दारुल उलूम का वाइस चांसलर नियुक्त किया था.
लेकिन उसके बाद वस्तानवी ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ में कुछ कहा जो कई मुसलमानों को ख़ासा नापसंद आया.












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