बंधक संकट : सरकार ने मांगें मानी, 48 घंटे में होगी रिहाई (राउंडअप)

नक्सलियों द्वारा चयनित तीन मध्यस्थों में से एक जी. हरगोपाल ने कहा, "हम अपनी मध्यस्थता के परिणाम से संतुष्टि जाहिर करते हैं।"

इस बीच दोनों बंधकों की रिहाई के लिए राज्य के गृह सचिव यू.एन.बेहरा और पंचायती राज सचिव एस.एन.त्रिपाठी ने यहां राज्य अतिथि गृह में वार्ताकारों दंडपाणी मोहंती, जी. हरगोपाल व आर.सोमेश्वर राव के साथ मंगलवार को बातचीत की। इसके बाद हरगोपाल ने यह घोषणा की।

मंगलवार को बेहरा ने पत्रकारों से कहा, "हमने नक्सलियों की सभी 14 मांगों पर अपनी सहमति दे दी।"

उन्होंने कहा, "अब सभी मुद्दों का हल निकाल लिया गया है। मध्यस्थों ने हमें जिलाधिकारी और जूनियर इंजीनियर की सुरक्षित रिहाई का वादा किया है।"

ज्ञात हो कि नक्सलियों ने गत 16 फरवरी को मलकानगिरी के जिलाधिकारी आर. विनील कृष्णा और जूनियर इंजीनियर पवित्र मोहन मांझी को अगवा कर लिया था। नक्सलियों ने दोनों की रिहाई के लिए सरकार को अपनी मांगों वाला एक पत्र सौंपा था।

उनकी मांगों में राज्य में उनके खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों को रोकने, सभी राजनीतिक कैदियों की रिहाई, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के साथ करारों को रद्द करने और पुलिस हिरासत में मारे गए नक्सलियों के साथ सहानुभूति रखने वाले लोगों के परिवार को मुआवजा देना शामिल था।

उनकी इस मांग पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने गत 17 फरवरी को उनके खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को रोक दिया और सोमवार को उनकी 14 मांगों को मान लिया। एक स्थानीय अदालत ने मंगलवार को एक नक्सली की जमानत अर्जी भी मंजूर की।

नक्सली श्रीनिवास श्रीमानुलु इस समय मलकानगिरी जिले के एक जेल में बंद है और उसके ऊपर कई आरोप हैं।

मलकानगिरी की अदालत में कार्यवाही के बाद राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "उसे केवल एक मामले में जमानत मिली है। वह अभी जेल में ही रहेगा क्योंकि उसके खिलाफ चार और आपराधिक मामले लम्बित हैं।"

सूत्रों ने बताया कि बंधकों की रिहाई पर बातचीत की प्रक्रिया तेज करने के लिए नक्सलियों ने जो कई शर्ते रखी हैं उनमें श्रीमानुलु की रिहाई भी शामिल है।

सूत्रों के अनुसार श्रीमानुलु की रिहाई में सरकार की कोई भूमिका है यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है लेकिन जानकार इस घटना को बातचीत की प्रक्रिया से जोड़कर देख रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को बातचीत शुरू होने से पहले दो मध्यस्थों ने बातचीत की प्रक्रिया तेज करने के लिए यहां एक जेल में लाए गए शीर्ष नक्सली नेता से मुलाकात की।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "पुलिस का एक विशेष दल गांति प्रसादम को कोरापुट की एक जेल से लेकर सड़क मार्ग से मंगलवार तड़के भुवनेश्वर पहुंचा। प्रसादम को भुवनेश्वर की झारपाड़ा जेल में रखा गया है।"

अधिकारी ने कहा, "प्रसादम के यहां पहुंचने के साथ ही दो मध्यस्थों, जी.हरगोपाल व दंडपाणी मोहंती ने उनसे जेल में मुलाकात की और उनके साथ बातचीत की।"

बंधकों की सुरक्षित रिहाई के लिए सरकार के साथ बातचीत कर रहे मध्यस्थों ने गांति प्रसादम को यहां लाने के लिए कहा था। गांति प्रसादम एक नक्सली विचारक हैं और आंध्र प्रदेश एवं उड़ीसा में उसके खिलाफ कई आरोप हैं।

हरगोपाल ने सोमवार को कहा था, "गांति प्रसादम के आ जाने के बाद बातचीत की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।"

सूत्रों के अनुसार गांति प्रसादम को आंध्र प्रदेश की एक जेल से शनिवार की रात लाए जाने के लिए पुलिस ने एक अदालत से जेल स्थानांतरण वारंट हासिल कर लिया था।

गांति प्रसादम के वकील ने कटक उच्च न्यायालय में सोमवार को एक जमानत याचिका दायर की। बातचीत की प्रक्रिया जारी रखने के लिए सरकारी वकील द्वारा इस जमानत याचिका का विरोध न किए जाने की सम्भावना है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "अदालत इस जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई कर सकती है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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